जानिए नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद क्या होगा बिहार में

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नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद बिहार में नई सरकार को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। 243 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 122 विधायकों की जरूरत है। बीजेपी और जेडीयू अगर साथ आती हैं तो बिहार में सरकार बन सकती है। महागठबंधन टूटने के बाद बिहार में नई सरकार को लेकर तीन विकल्प हैं। क्या हैं तीन विकल्प…

1) नीतीश और बीजेपी साथ आएं

नीतीश की पार्टी जेडीयू के पास 71 विधायक हैं। बहुमत का आंकड़ा 122 है। ऐसे में जेडीयू को 51 विधायकों की जरूरत और होगी। बीजेपी के साथ जाने पर उन्हें एनडीए के 58 विधायक मिलाकर आंकड़ा 129 हो जाता है जो बहुमत से 7 ज्यादा है।

2) आरजेडी-बीजेपी साथ आएं

आरजेडी के पास 80 विधायक हैं अगर लालू बीजेपी से हाथ मिलाते हैं तो एनडीए के 58 विधायक मिलाकर ये संख्या 138 हो जाएगी। जो बहुमत से 16 ज्यादा है। लेकिन, लालू बीजेपी से हाथ मिलाएंगे ऐसा बहुत मुश्किल है। इसलिए ये विकल्प लगभग असंभव है।

3) नए सिरे से चुनाव

नीतीश अगर बीजेपी के साथ नहीं जाते और महागठबंधन के साथ भी उनकी कोई डील नहीं होती तो बिहार में नए सिरे से चुनाव कराने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचेगा।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

सीबीआई ने 5 जुलाई को लालू, राबड़ी और तेजस्वी यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। 7 जुलाई को सुबह CBI ने लालू से जुड़े 12 ठिकानों पर छापे मारे। जांच एजेंसी के मुताबिक 2006 में जब लालू रेलमंत्री थे, तब रांची और पुरी में होटलों के टेंडर जारी करने में गड़बड़ी की गई।

इसके बाद तेजस्वी के इस्तीफे की मांग उठने लगी। मामला तब गरमा गया जब नीतीश कुमार की अगुआई में इस मसले पर 11 जुलाई को जेडीयू की अहम बैठक हुई।

इससे पहले मई से ही लालू और उनके परिवार के खिलाफ 1000 करोड़ की बेनामी प्रॉपर्टी के आरोपों की इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जांच कर रहा था। मीसा और उनके पति के ठिकानों पर भी छापे मारे जा चुके थे।

जेडीयू ने कब रुख सख्त किया?

तेजस्वी पर एफआईआर के बाद जेडीयू ने कहा कि जिन पर आरोप लगे हैं, वे जनता ले सामने फैक्ट्स के साथ जवाब दें। इस्तीफे के बाद भी नीतीश ने यही बात दोहराई कि उन्होंने तेजस्वी से इस्तीफा नहीं सिर्फ सफाई मांगी थी। जेडीयू ने कभी करप्शन के मामले में समझौता नहीं किया है। हमने तो इसकी मिसाल पेश की है। फिर चाहे वे जीतनराम मांझी का मामला हो या अनंत सिंह का। नीतीश कुमार अपनी छवि और भ्रष्टाचार की समस्या से समझौता नहीं करेंगे।

विधानसभा की स्थिति क्या है?

बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं। आरजेडी सबसे बड़ा दल है। उसके पास 80 विधायक हैं। जेडीयू दूसरे नंबर पर है जिसके 71 विधायक हैं। महागठबंधन में शामिल तीसरे दल कांग्रेस के पास 27 सीटें हैं। बीजेपी विपक्ष में है। उसके पास 58 सीटें हैं।

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