सिंगापुर के डिप्टी पीएम थरमन षणमुगरत्नम ने दी मोदी सरकार को इस संकट की चेतावनी

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चुनाव जीतने के लिए हर साल दो करोड़ रोजगार पैदा करने का मोदी सरकार का किया गया वादा जमीन पर नहीं उतर रहा है। सरकार जीडीपी ग्रोथ आंकड़ों का हवाला देकर आर्थिक तरक्की का ढोल पीट रही है। लेकिन दुनिया भर के विशेषज्ञों और नेताओं को मोदी सरकार की इस कथित उपलब्धि की हकीकत मालूम है।

दो दिन पहले दिल्ली इकोनॉमिक कॉनक्लेव में हिस्सा लेने भारत आए सिंगापुर के डिप्टी पीएम थरमन षणमुगरत्नम ने सरकार को रोजगार के मोर्चे पर तेजी से बढ़ रहे संकट पर चेतावनी दे डाली। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर भारत ने अपनी नौजवान पीढ़ी को रोजगार के लायक नहीं बनाया तो इसका डेमोग्राफिक डिविडेंड, डेमोग्राफिक डेफिसिट में बदल जाएगा।

 

षणमुगरत्नम ने साफ कहा कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती रोजगार के मोर्चे पर है। बेरोजगारी इस देश के लिए सबसे बड़ी बाधा बन कर उभरेगी क्योंकि बुनियादी मजबूती न होने की वजह से स्किल डेवलपमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर और एजुकेशन को मजबूत करने की दिशा में भारत बड़ा वक्त गंवा चुका है। सिंगापुर के डिप्टी पीएम जिस कॉन्क्लेव में मोदी सरकार को यह चेतावनी दे रहे थे उसमें वित्त मंत्री अरुण जेटली भी मौजूद थे।

 

 

सिंगापुर के डिप्टी पीएम ने मोदी सरकार को जिस खतरे से आगाह कराया वह एक हकीकत है। सरकार की मैन्यूफैक्चरिंग पॉलिसी फेल हो चुकी है। जापान और चीन से बड़े निवेश आकर्षित करने की नीति बना कर देश को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने का सपना देखने वाले मोदी इस मोर्चे बिल्कुल नाकाम साबित हुए हैं। कारोबार सुगमता की दिशा में भारत को टॉप 50 देशों में शामिल करने की कोशिश सिरे नहीं चढ़ी है और निवेशकों ने भारतीय बाजार से दूरी बना ली है।

 

स्किल इंडिया योजना का बुरा हाल है। इस कार्यक्रम की ठीक से ऑडिटिंग न होने से यह गड़बड़ियों का जखीरा बन चुका है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की फ्रेंचाइजी के खराब प्रदर्शन के बाद सरकार ने कई ऐसे केंद्रों को रद्द करने का आदेश दिया है। एजुकेशन और ट्रेनिंग सेक्टर में सरकार कोई बड़ा सुधार करने में नाकाम रही है। डिजिटल इंडिया के सपनों को भी झटका लगा है क्योंकि अब तक सरकार 78 फीसदी गांवों में ब्रॉडबैंड नहीं पहुंचा सकी है। यह कार्यक्रम अपने लक्ष्य से बहुत पीछे चल रहा है।

 

सिंगापुर के डिप्टी पीएम ने साफ कहा है कि सरकार अपने स्किल कार्यक्रम को रोजगार से लिंक करने में नाकाम दिख रही है । 2014 के चुनावों में मोदी ने युवाओं को बेहतर जिंदगी का सपना दिखाया था। इस वजह से बड़ी तादाद में उन्होंने बीजेपी को वोट दिया था। अगर सरकार ने तेजी से रोजगार बढ़ाने के उपाय नहीं किए तो 2019 के चुनाव में एनडीए युवाओं के समर्थन से महरूम हो सकती है। सरकार के कर्ता-धर्ताओं को यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए।

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