मोदी राज में टमाटर की सुरक्षा में पहली बार दिखाई दिए हथियारबंद गार्ड

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केंद्र की मोदी नेतृत्व वाली सरकार में ऐसे दिन भी देखने को मिलेंगे, शायद ही किसी ने ऐसा सोचा होगा। सब्जियों के आसमान छूते दामों से जहां ग्राहकों में हाहाकार है वहीं महंगी सब्जियों की सुरक्षा दुकानदारों का सिर दर्द बना हुआ है। टमाटर का सब्जी मंडी से गरीब की रसोई तक पहुंचना अब लगभग नामुमकिन जैसा हो गया है। टमाटर 60 रुपये से लेकर 100 रुपये तक बिक रहे हैं। ऐसे में सब्जी व्यापारियों को टमाटर पर खतरा नजर आने लगा है, उन्हें डर सताने लगा है कि कोई चोर टमाटर न उड़ा ले जाए। इस खतरे को भांपते हुए सब्जी व्यापारियों ने टमाटर की सुरक्षा में हथियारबंद गार्ड तैनात करा दिए हैं।

 

टमाटर की सुरक्षा के लिए तैनात हथियारबंद गार्ड की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह तस्वीर बीजेपी शासित मध्य प्रदेश के इंदौर की है। 100 रुपए के भाव से बिक रहे टमाटर की चोरी का डर सताना तो लाजमी है। बताया जा रहा है कि हथियारबंद गार्ड की व्यवस्था व्यापारियों और किसानों के अनुरोध पर सब्जी मंडी समिति ने की है। टमाटर को एक मीनट के लिए भी अकेला नहीं छोड़ा जा रहा है उसकी सुरक्षा में हथियारबंद गार्ड 24 घंटे तैनात है।

 

दरअसल, थोक व्यापारी सुभाष नारंग ने मंडी समिति के सामने यह बात रखी थी कि जैसे कुछ दिनों पहले मुंबई में गुंडों ने टमाटर व्यापारियों को निशाना बनाकर टमाटर की गाड़ियों को लूट लिया था, वैसा ही यहां भी हो सकता है। किसान और व्यापरी इतने डरे हुए थे कि उन्होंने शनिवार को मंडी में टमाटर की गाड़ी लाने के पहले मंडी समिति से सुरक्षा की मांग की।

किसानों और व्यपारियों के इस डर को देखते हुए मंडी समिति ने तुरंत अपने बंदूकधारी गार्ड को टमाटर की गाड़ियों की सुरक्षा के लिए रवाना कर दिया। ‘दैनिक भाष्कर’ के मुताबिक, मंडी में आने से फुटकर ग्राहकों के बैग में जाने के बीच टमाटर को लगातार वीआईपी स्टेटस दिया गया। गाड़ियों के मंडी में आने से लेकर माल बिकने तक हर गाड़ी के आसपास तीन से चार गार्ड्स अपनी बंदूक लेकर तैनात रहे।

 

आपको बता दें कि जिस टमाटर की सुरक्षा अभी बंदूकधारी जवान कर रहे हैं, तीन महीने पहले उसके हाल-बेहाल थे। तीन महीने पहले थोक में टमाटर के दाम चार आने से लेकर एक रुपए किलो हो गए थे। तब टमाटर बेचने आए कई किसान अपना माल सड़क पर फेंककर चले गए थे, क्योंकि टमाटर बेचने से मिले रुपए गाड़ी के भाड़े से भी कम थे।

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