मोदी सरकार के विरोध में उतरा RSS मज़दूर संगठन, ख़राब आर्थिक नीतियों के लिए संसद तक निकालेगा मार्च

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मोदी सरकार अपनी आर्थिक नीतियों पर देशभर में विरोध झेल रही है। और अब विरोध की आवाज़ भाजपा के मातृ संगठन आरएसएस से भी आने लगी है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक खबर के मुताबिक आरएसएस के मज़दूर संगठन ने मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए फैसला किया है कि वो सरकार के विरोध में संसद तक मार्च निकालेगा।

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भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस), जो 5,000 से अधिक संबद्ध यूनियनों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है, ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि न ही नौकरी पैदा हुई हैं और न ही स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा मिला है।

यह संगठन 17 नवंबर को मोदी सरकार की “श्रम विरोधी नीतियों” के विरुद्ध संसद तक एक मार्च का आयोजन करेगा। गौरतलब है कि इससे पहले पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा नेता यशवंत सिन्हा भी मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना कर चुके हैं। बीएमएस के अध्यक्ष साजी नारायणन ने कहा कि इस सरकार की नीतियों में आम आदमी की भागीदारी बिलकुल नहीं है।

बीएमएस ने कहा कि सरकार ने नौकरियां पैदा करने के लिए पर्याप्त कार्य नहीं किया। भले ही सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ जैसी प्रमुख योजनाओं की घोषणा नौकरी और उद्यमी बनाने के इरादे से की है। विकास का लाभ सामाजिक क्षेत्र तक नहीं पहुँच रहा है बुलेट ट्रेनों, फ्लाइओवर, एक्सप्रेस हाइवे और हवाई अड्डों जैसे प्रस्ताव बेकार हैं जबतक गरीबों के विकास की उपेक्षा के हो रही है।

बीएमएस ने सरकार द्वारा आर्थिक विकास या जीडीपी के आकड़े जुटाने पर भी आशंका जताई। इसने नीति आयोग को पुन: स्थापित करने को भी कहा।

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