पीएम मोदी के आगे RBI ने भी जोड़े हाथ, पढ़िए पूरी खबर और जानिए क्या है पूरा मामला

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी तरफ से तो पूरी कोशिश की कि देश की जनता के सामने अच्छा बनने के लिए नोटबंदी का खेल खेला जाए। लेकिन उन्हें क्या पता की उनके इस फैसले से कैसे देश की आधी जनता उनके खिलाफ हो जाएगी। पीएम मोदी अभी तक उन सवालों का जवाब नहीं दे पाए हैं, जो मीडिया व देश की जनता ने उनके सामने रखे थे। नोटबंदी के कारण जो लोगों को नुकसान हुआ, जिन लोगों की जान गई, उसका जिम्मेदार आखिर कौन है।

 

ज़ाहिर सी बात है कि उसका जिम्मेदार मोदी जी ही हैं। इसी के चलते रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने भी मोदी से परेशान होकर मोदी सरकार की पोल खोली है। आइये आपको बताएं आखिर क्या है पूरा मामला। पिछले साल 8 नवंबर को देश में नोटबंदी की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे कालाधन और भ्रष्टाचार समाप्त होने की बात कही थी।

यही नहीं इस साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि नोटबंदी से सवा लाख करोड़ रुपये का कालाधन वापस आया है लेकिन उनके इस दावे की पोल तब खुल गई जब आरबीआई ने एक संसदीय समीति से कहा कि उसके पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि नोटबंदी से कितना कालाधन समाप्त हुआ है।

नोटबंदी के बाद 15.28 लाख करोड़ रुपये के बंद किए गए नोट लौटे
आरबीआई ने कहा कि उसे यह भी पता नहीं है कि 500 और 1000 के नोटों को बंद करने के बाद नोटों को बदलने की प्रक्रिया में कितनी बेहिसाबी नकदी को वैध धन में बदला गया है। रिजर्व बैंक ने कहा कि नोटबंदी के बाद अनुमान के मुताबिक 15.28 लाख करोड़ रुपये के बंद किए गए नोट लौटे हैं। भविष्य में सत्यापन की प्रक्रिया में इस आंकड़े में सुधार किया जा सकता है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसके पास इस बात की भी सूचना नहीं है कि क्या नियमित अंतराल के बाद नोटबंदी की किसी तरह की योजना है। बता दें पिछले सप्ताह आखिरकार रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के बाद वापस लौटे नोटों का आंकड़ा सार्वजनिक किया था। इसमें कहा गया है कि नोटबंदी के बाद चलन से बाहर किए गए नोटों में से 15.28 लाख करोड़ रुपये सिस्टम में वापस लौटे हैं। यह बंद नोटों का करीब 99 प्रतिशत बैठता है। केंद्रीय बैंक ने यही आंकड़े वित्त पर संसद की स्थाई समिति से भी साझा किए हैं।

समिति के सवालों के जवाब में रिजर्व बैंक ने कहा कि वापस लौटे नोटों के सत्यापन की प्रक्रिया अभी जारी है। यह बड़ा आंकड़ा है, ऐसे में सत्यापन की प्रक्रिया को पूरा करने में अभी कुछ समय लगेगा। यह काम तेजी से जारी है और रिजर्व बैंक दफ्तर में डबल शिफ्ट में काम किया जा रहा है। इसके लिए हाई एंड स्क्रूटनी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

रिजर्व बैंक ने कहा, ‘जब तक रिजर्व बैंक इन नोटों के आंकड़ों का पूरी तरह सत्यापन नहीं कर लेता, तब तक इसके बारे में अनुमान ही दिया जा सकता है।’

भविष्य में इसमें सुधार से पहले 30 जून तक कुल 15.28 लाख करोड़ रुपये के बंद नोटों का आंकड़ा उसके पास है। इस सवाल कि नोटबंदी से कितना कालाधन समाप्त हुआ है, केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसके पास इसकी कोई सूचना नहीं है। कितना कालाधन पुराने नोटों को बदलने की प्रक्रिया में सफेद हुआ है, इस पर भी रिजर्व बैंक ने यही जवाब दिया है कि उसके पास इसकी कोई सूचना नहीं है।

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