अपने जन्मदिन पर इधर मोदी जी दबाएंगे बटन, उधर बन जाएगी हज़ारों गरीबों की जलसमाधि

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नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में बाढ़ की चपेट में आये लाखों पीड़ितों को राहत देने के बजाए पीएम मोदी अपने जन्मदिन के अवसर पर अति उत्साहित होकर ऐसा काम करने जा रहे हैं जिससे हजारों गरीबों के घर जल समाधि में बदल जायेंगे.

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन के अवसर पर सरदार सरोवर परियोजना के 30 दरवाजे खोलने जा रहे हैं. इस मौके पर जहां गुजरात में जश्न का माहौल होगा वहीं पड़ोसी मध्यप्रदेश के कई जिलों में मातम पसरा होगा.

सरदार सरोवर बांध के दरवाजे खुलने से कई जिले पानी में समा जाएंगे. इन जिलों में से एक निसरपुर के करीब 25 घर आज डूब की कगार पर हैं, लेकिन इन घरों में रहने वाले लोगों की जिद है कि वह अपना घर नहीं छोड़ेंगे. लोग बांध के पानी में डूबकर जान देने को तैयार हैं, लेकिन अपने घरों को छोड़ने लिए नहीं.

 

यहां के लोग सरदार सरोवर परियोजना का विरोध कर रहे हैं. इस बांध की चपेट में राजघाट में बापू की समाधि, खेत-खलिहान सब आने वाले हैं. इनको बचाने के लिए लोगों ने जलसत्याग्रह पर बैठने का ऐलान किया है. लेकिन गोदी मीडिया मोदी गुणगान में मगन है.

प्रख्यात समाजसेवी मेधा पाटकर इस मामले में सीधे प्रधानमंत्री को कठघरे में खड़ा करते हुए कहती हैं कि बांध के लोकापर्ण का जश्न फर्जी साबित होने वाला है. उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत गुजरात के किसानों को कम और कोका-कोला, नैनो को ज्यादा पानी देने की तैयारी की जा रही है.

आंदोलनकारियों को लगता है कि पुनर्वास में सियासत के साथ भ्रष्टाचार भी है. पाटकर ने कहा शिवराज सिंह 900 करोड़ का पैकेज दे रहे हैं, केंद्र भी पैकेज दे रहा है लेकिन क्यों? जब 2015 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कागजात पर उन्होंने बताया है कि इन जिलों में जीरो बैलेंस है. अनिल माधव दवे ने सरदार सरोवर को मंजूरी नहीं दी थी. ये माधव दवे वही हैं जिन्होंने मध्यप्रदेश में बीजेपी की नीव मजबूत करने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था. लेकिन इसी साल उनकी वर्षी पर बीजेपी के किसी नेता ने फूल तक नहीं चढ़ाया.

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