PM मोदी के ‘गुजरात मॉडल’ के गाँव का बुरा हाल, महीने में एक बार सिर्फ 1 घंटे के लिए आता है पानी

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गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान गुजरात के बारे कुछ ऐसी भयानक सच्चाईयां बाहर आ रही हैं जो बताती हैं कि गुजरात ‘विकास मॉडल’ नहीं बल्कि ‘प्रचार मॉडल’ है।

एक ऐसा मॉडल जिसे केवल प्रचारित करने के लिए पैसा खर्च किया जाता है। एक ऐसी सरकार का मॉडल जो केवल अपने नाम के लिए खर्च करती है चाहे जनता के प्राण जाते रहें।






Newsclick की एक खबर के अनुसार गुजरात के भावनगर में एक ऐसा गाँव हैं जहाँ केवल एक महीने में एक बार पानी आता है। ये पानी भी केवल एक घंटे के लिए ही आता है। इस गाँव का नाम मच्छिवाड़ा है।

राज्य सरकार की नीति देखिए कि एक तरफ इस गाँव में लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं।

दूसरी तरफ हाल ही में गुजरात की भाजपा सरकार ने उसी भावनगर ज़िले के घोघा गांव में 614 करोड़ रुपए की RO-RO (रोल-ऑन रोल-ऑफ) फेरी सेवा शुरू की है। इस सेवा का उद्घाटक प्रधानमंत्री मोदी ने किया था और इसे मीडिया में जमकर दिखाया गया लेकिन वहां से कुछ ही दूर पानी के लिए तरस रहे मच्छिवाड़ा में कोई अपना कैमरा नहीं लेकर गया।

मच्छिवाड़ा में रहने वाले ज़्यादातर लोग मछली पकड़ने का काम करते हैं। यहाँ के निवासियों का कहना है कि यहाँ नगर निगम से एक महीने में सिर्फ एक बार ही पानी आता है। वे कहते हैं कि हमलोग भूजल का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं क्योंकि यह खारा है।

गाँव में रहने वाले असलम से यह पूछ जाने पर कि वे पानी के बिना किस तरह अपना ज़रूरी काम चलाते हैं बताया कि उन्हें टैंकरों को फोन करना पड़ता है और पानी का लिए पैसे का भुगतान करना पड़ता है। असलम ने आगे कहा कि चूंकि हम टैंकर से पानी खरीदने के लिए हर रोज़ 150 रुपए खर्च नहीं कर सकते, इसलिए हम गांव से क़रीब 200 मीटर दूर स्थित एक तालाब से ज़्यादातर पानी लाते हैं।

असलम ने कहा कि स्थानीय झींगा जैसी ही छोटी मछलियां हमारे जाल में पकड़ी जाती हैं और वह भी बहुत छोटी मात्रा में। हम उन्हें स्थानीय बाज़ार में बेचते हैं और हर महीने लगभग 3,000 रुपए ही कमा पाते हैं। यही आजीविका का एकमात्र स्रोत है जिनसे परिवार का ख़र्च चलता है।

गाँव में कोई पक्की सड़क नहीं है। गाँव में रहने वाले लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में गाँव में प्रवेश करना मुश्किल हो जाता है। लगभग 15,000 ग्रामीणों की कुल आबादी के लिए पड़ोस में केवल एक ही अस्पताल है। शिक्षा का ये हाल है कि केवल 10वीं तक के लिए स्कूल है और आगे की पढ़ाई के लिए 25 किलोमीटर दूर भावनगर जाना पड़ता है।

गाँव के एक अन्य निवासी ने कहा कि इस अस्पताल में केवल आपातकालीन सेवाएँ ही उपलब्ध है यदि किसी महिला को लेबर पेन होता है उसे भावनगर के अस्पताल ले जाना पड़ता है।

Courtesy: Bolta Hindustan

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