नीतीश और अमित शाह का डीएनए हुआ मैच, दोनों पर 302 का मुकदमा

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पटना। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने गुजरात से राज्यसभा के लिए पर्चा भरा है। बीजेपी संसदीय बोर्ड ने अमित शाह को राज्यसभा भेजने का फ़ैसला किया है। माना जा रहा है कि अमित शाह की रणनीति की वजह से ही बिहार में तख्तापलट हुआ और नीतीश कुमार ने महागठबंधन तोड़ बीजेपी के सहयोग से सरकार बनाई और छठीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने।

 

खास बातें-

  1. नीतीश कुमार और अमित शाह के डीएनए को सोशल मीडिया में लोगों ने बताया एक
  2. नीतीश कुमार और अमित शाह दोनों पर हत्या का मुकदमा
  3. मोदी ने बताई थी नीतीश कुमार के डीएनए में गड़बड़ी
  4. अब लोगों ने अमित शाह के बहाने डीएनए मुद्दे पर मोदी नीतीश को घेरा

इस बीच सोशल मीडिया पर लोग अमित शाह और नीतीश कुमार के डीएनए को लेकर टिप्पणी कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि नीतीश कुमार और अमित शाह का डीएनए मैच कर गया है। दोनों पर धारा 302 यानि हत्या का मुकदमा है। दोनों बड़े अपराधी हैं और दोनों राजनीति में बने रहने के लिए किसी की भी हत्या करवा सकते हैं और दोनों की एफिडेविड में भी हत्या और आर्म्स एक्ट का मुकदमा पाया गया है। इन दोनों ने ही FIR होने के बाद कुर्सी नहीं छोड़ी।

 

अमित शाह ने साल 2012 में जब गुजरात विधानसभा का पर्चा भरा था तो उसमें उन्होंने जो एफिडेविड दिया था उसमें हत्या, ज़बरन उगाही, आर्म्स एक्ट और कई गंभीर केस दर्ज थे। 120B का भी केस है। वो जेल में भी रह चुके हैं। अमित शाह पर सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ की साजिश रचने का भी आरोप है। सीबीआई ने इस मामले में शाह के खिलाफ हत्या, फिरौती और साजिश रचने का आरोप लगाया था। आरोप है कि शाह ने इसके लिए गुजरात के डीजीपी डी जी वंजारा की मदद ली थी।

(साल 2012 में अमित शाह द्वारा दिया गया एफिडेविट)

इसी तरह नीतीश कुमार पर भी हत्या का आरोप लग चुका है। साल 1991 के एक केस में उन पर हत्या का मामला दर्ज कराया गया था। लालू ने दावा किया कि नीतीश कुमार पर मर्डर केस का आरोप है। लालू यादव ने कहा, ‘नीतीश कुमार ने चुनाव आयोग को दिए अपने हलफनामे में इस बात को स्वीकार किया है कि उनके ऊपर आईपीसी की धारा 302, 310, 307 का केस चल रहा है। 302 में फांसी या उम्रकैद की सजा होती है। अत्याचार का केस कथित भ्रष्टाचार से बड़ा होता है।’

(नीतीश कुमार द्वारा चुनाव आयोग को दिया गया एफिडेविट)

लोग यह भी कह रहे हैं कि सीएम नीतीश कुमार ने बिहार में लोकतंत्र की हत्या की है। कई लोगों ने पीएम मोदी और नीतीश कुमार दोनों का डीएनए खराब बताया है। लोगों का कहना है कि नीतीश अवसरवादी और कुर्सी के चिप्पू हैं। तेजस्वी के बढ़ते कद से नीतीश कुमार डर गए थे, इसलिए बीजेपी की गोद में जाकर बैठ गए हैं।

आपको बता दें कि साल 2013 में पीएम मोदी का विरोध करते हुए नीतीश कुमार ने एनडीए से गठबंधन तोड़ लिया था। नीतीश कुमार ने पीएम मोदी को गुजरात दंगों का आरोपी बताया था। फिर जब साल 2015 में बिहार का विधानसभा चुनाव आया तो पीएम मोदी ने बिहार की एक रैली में नीतीश कुमार के डीएनए पर सवाल उठाया था।

 

25 जुलाई 2015 को नरेंद्र मोदी बिहार के मुजफ्फरपुर में आयोजित एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उस वक्त पीएम मोदी ने कहा था कि इन्होंने मुझसे हाथ में थाली देकर खींच लिया था उस वक्त मुझे लगा कि कोई बात नहीं। लेकिन एक महादलित से तो उन्होंने सारा का सार पुण्य खींच लिया। उसके बाद मुझे लगा कि शायद डीएनए में ही कोई गड़बड़ है। दरअसल नीतीश कुमार ने जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बनाने के बाद उनसे कुर्सी ले ली थी, जिस पर पीएम मोदी उन पर निशाना साध रहे थे।

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नीतीश ने डीएनए बयान के बाद पीएम मोदी को भेजी थी ये चिट्ठी

इसके बाद नीतीश कुमार ने पीएम मोदी के डीएनए वाले बयान को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया था। नीतीश कुमार चुनाव के दौरान अपनी हर सभा में डीएनए का मुद्दा उठाते थे। इसके लिए उन्होंने ‘शब्द वापसी अभियान’ की शुरुआत की थी और गया की रैली में उन्होंने पीएम को खत लिख शब्द वापस लेने की बात कही थी। जब पीएम ने कोई जवाब नहीं दिया तो नीतीश ने कहा कि बिहार से पचास लाख लोगों को सैंपल डीएनए टेस्ट के लिए पीएम मोदी को भेजेंगे।

उसके बाद नीतीश ने डीएनए सैंपल कलेक्ट करने के लिए एक बड़ा अभियान छेड़ दिया था। जिसके तहत जेडीयू के नेता जगह-जगह पर स्टॉल लगाकर बाल व नाखून के सैंपल क्लेक्ट करने लगे थे। लाखों लिफाफे में बंद कर बिहार के लोगों का डीएनए सैंपल प्रधानमंत्री मोदी को भेजा गया था। हालांकि उस डीएनए सैंपल का क्या हुआ यह तो नहीं पता।

 

अब जब एक बार फिर नीतीश कुमार व पीएम मोदी दोस्त बन गए हैं। बीजेपी और नीतीश कुमार की इस दोस्ती में बीजेपी अध्यक्ष का बड़ा हाथ माना जा रहा है। लेकिन अब सोशल मीडिया में लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया है कि भले ही नीतीश कुमार के डीएनए में कोई गड़बड़ी रही हो या नहीं लेकिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और नीतीश कुमार का डीएनए जरूर मैच कर गया है।

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