रेल हादसा: नमाज छोड़ मुस्लिमों ने घायलों की जान बचाई, हिंदू संतों ने कहा – नहीं आते तो आज जिंदा नहीं बचते

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देश भर में गंदी राजनीति के चलते लोगों के बीच हिन्दू-मुसलमान की दिवार खड़ी की जा रही है. ईद की नमाज के नाम पर तो जन्माष्टमी को लेकर लोगों के बीच नफरत पैदा की जा रही है. बावजूद इसके आज भी दोनों धर्मों के लोग इंसानियत का पाठ नहीं भूले है.

ताजा मामला मुजफ्फरनगर में खतौली रेलवे स्टेशन के पास हुए उत्कल एक्सप्रेस हादसे से जुड़ा है. दरअसल जिस जगह ये हादसा हुआ. वहां करीब में ही एक मस्जिद स्थित है. हादसा नमाज के वक्त हुआ था. हादसें में घायल हुए लोगों को स्थानीय मुसलमान नमाज छोड़कर बचाने पहुँच गए. जिसके चलते सेकड़ों जाने बच गई.

मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसाः जानें, घायलों की जुबानी

 

हादसे में घायल हुए संत हरिदास ने बताया, सब कुछ अचानक हुआ. तेज धमाके की आवाज के बाद डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए. चीख-पुकार मच गई. किसी को कुछ समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या? कुछ होश आया तो डिब्बे पूरी तरह पलट चुके हैं. लोग जान बचाने के लिए चिल्ला रहे थे, ऐसे में पास की मुस्लिम बस्ती से कुछ युवक दौड़कर आए और एक-एक कर डिब्बे में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने लगे.

वहीँ संत मोनीदास ने बताया, अगर समय रहते मुस्लिम युवक उन्हें ना बचाते, तो मरने वालों की संख्या और अधिक हो सकती थी. वो कहते हैं, अगर मुस्ल‍िम युवक न आते तो बचना मुश्क‍िल था. घायलों को डिब्बों से निकालने वालों में शामिल रिजवान कहते हैं कि एक ही डिब्बे से 40 से अधिक घायलों को बाहर निकाला, 5-6 ऐसे थे जिनकी मौत हो चुकी थी.

रिजवान ने बताया, जिस समय ये हादसा हुआ वो अपने घर से नमाज पढ़ने मस्जिद जा रहे थे. तभी उन्होंने तेज आवाज सुनी. रेलवे ट्रैक की ओर देखा तो ट्रेन पलटी हुई थी. कुछ देर बाद नमाज होने वाली थी लेकिन मुसलमान भाई मस्जिदों से निकले और लोगों की जान बचाने में जुट गए.

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