जितने आतंकियों को मोदी सरकार ने 4 सालों में मारे, उससे 3 गुना ज्यादा कांग्रेस ने एक साल में मारे थे, देखें आंकड़े

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The State Post: पिछले दिनों में अमरनाथ जा रहे श्रद्धालुओं पर हुए आतंकी हमले ने देश को झकझोर के रख दिया है। इसके बाद से सरकार के उन दावों पर भी लगातार सवाल उठाये जाने लगे हैं जिनके दम पर भाजपा 2014 लोकसभा चुनाव फ़तेह किए।

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पठानकोट और उरी हमले के बाद भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक पर मोदी सरकार ने अपना कॉपीराइट लगा के देश भर में बहुत वाह वाह लूटी। पाकिस्तान और आतंक भाजपा का सबसे ज्यादा पसंदीदा मुद्दा रहा है। इस मुद्दे पर उसने कांग्रेस शासन को खूब घेरा था लेकिन इन्ही मुद्दों पर भाजपा की नीति पूरी तरह से धराशाई हो गई है। इन मुद्दों पर भाजपा चाहे जितना लोगों को बहला फुसला ले लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं।

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इन आंकड़ों की माने तो मई 2014 के बाद से अब तक मोदी सरकार ने जितने आतंकियों को मार कर अपना सीना ठोंक रही है उसके करीब तीन गुना ज्यादा आतंकियों को मनमोहन सरकार ने एक साल में मरवाये थें। इन साढ़े तीन सालों में मोदी सरकार के कार्यकाल में कुल 483 आतंकियों को मारा गया है। जबकि ये आंकड़े भाजपा के उन दावों जो झुठला रहे हैं जिसमे वो कांग्रेस पर इल्ज़ाम लगाते हैं कि कांग्रेस की सरकार में सेना पर पाबंदी लगाई जाती है। उन्हें आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही नहीं करने दी जाती। जबकि कांग्रेस के 2004 से 2014 के दस सालों के शासन में कुल 4249 आतंकियों को मौत के घाट उतारा गया। इसमें भी सबसे बड़ी आतंकी कार्यवाही 2005 में की गई थी जिसमे 1 साल में ही 100 आतंकियों को सेना ने मारा।

वहीं और करीब से इन आंकड़ों पर गौर करें तो पाएंगे कि मोदी सरकार में जितने आतंकी साढ़े तीन सालों में मारे गए हैं उससे ज्यादा आतंकियों को कांग्रेस ने 2004, 2005, 2006, 2007 में मारे।

इसका ये मतलब भी नहीं है कि कांग्रेस के समय में आतंकी हमले ज्यादा होते थे या अब कम हो गए हैं। बल्कि पिछले साढ़े तीन सालों में आतंकी हमले तेज़ी से बढ़े हैं। और वो कम होने का नाम नहीं ले रहे। ऐसे में भाजपा सरकार चाहे जो भी दावा कर ले। ज़मीन पर जो आंकड़े हैं उसकी माने तो वो इस रेस में कांग्रेस से कहीं ज्यादा पीछे है।

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