मोदीराज: अगर ये विधेयक कानून बना तो श्रम कानूनों की उड़ेंगी धज्जियां, लाखों होंगे बेरोजगार

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संसद के मानसून सत्र के दौरान 10 अगस्त को लोक सभा में एक विधेयक ‘द कोड ऑन वेजेज़’, 2017 पेश किया गया। अगर इस विधेयक ने कानून की शक्ल ली तो लाखों लोग बेरोजगारी की जद में आ जाएंगे। लोक सभा में पेश किए गए इस विधेयक की तरफ इशारा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शेष लिखते हैं-

उस ख़ौफ़नाक भविष्य की लोग कल्पना तक नहीं कर पा रहे हैं..! एक साथ तीन तलाक का कानून जब बनेगा, तब बनेगा ! लेकिन इसी दस अगस्त को लोकसभा में पेश एक विधेयक The Code on Wages, 2017 अगर कानून बन कर अमल में आया तो-





#अब मजदूरी दिन या घंटों के हिसाब से दी जा सकती है! अब मासिक तनख्वाह देना जरूरी नहीं रहेगा! #पंद्रह साल से कम के किशोर या बच्चे भी मजदूरी या काम के लिए रखे जा सकेंगे ! #काम के घंटे कुछ भी, जी 10-12-14… कुछ भी तय किए जा सकते हैं, यानी आठ घंटे की सीमा समाप्त। हफ्ते में एक दिन की छुट्टी।

कितने-कितने जतन से श्रम संबंधी कानूनों को मजदूरों के हक में सुनिश्चत किया गया था। अब उन सब पर डाका। ये मजदूरों को इस हालत में ले जाकर छोड़ेंगे कि वह गुलामी से अलग कोई चेहरा नहीं होगा। यह कानून बन कर अगर अमल में आया तो श्रम के मोर्चे पर अब तक की सारी मानवीयता और अधिकारों को निगल जाएगी यह सरकार..!





यह करोड़ों रुपए तोहफे (चंदा) के रूप में पार्टियों को दिए जाने का बदला है…। लेकिन यह भारत के कमजोर और मजदूर तबकों की गुलामी की संहिता साबित होगी। भयानक पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ेगी, सस्ते और यहां तक कि सिर्फ पेट पर खटने वाले मुफ्त के कामगारों की समूची फौज खड़ी होगी और उसके बाद कल्पना कीजिए कैसा समाज और कैसे लोग तैयार होंगे..!

जॉम्बी यानी जिंदा ड्रैकुला झुंड के झुंड में एक दूसरे को चीड़-फाड़ कर खाते दिखेंगे.. !

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