715 करोड़ का राफेल 1600 करोड़ में खरीद कर मोदी जी ने अंबानी और खुद का भला किया, देश का नहीं…

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जम्मू कश्मीर के उरी में आतंकी हमले के पैदा हुई भारत-पाकिस्तान की तनातनी के बीच फ्रांस के साथ राफेल फाइटर प्लेन को लेकर पिछले चार साल से चली आ रही डील सरकार ने लोगों के हक की कमाई से दुगुनी से भी ज्यादा कीमत देकर फायनल कर दी। इस विशालकाय रक्षा सौदे को मीडिया द्वारा फायदे का सौदा बताया जा रहा है। भक्त टाइप पत्रकार इस खबर को इस तरह प्रचारित कर रहे हैं कि जैसे डील पर मुहर लगते ही पाकिस्तान नेस्तनाबूत हो जाएगा। जबकि इन विमानों के आते आते मोदी की शरीफ से चार बाद दोस्ताना मुलाकातें हो चुकी होंगी।

चार साल पहले जब फ्रांस के साथ फाइटर प्लेन की खरीद के लिए समझौता हुआ था तो तब इस प्लेन की कीमत करीब 715 करोड़ रूपये थी, लेकिन अब मोदी सरकार दोगुने से भी ज्यादा कीमत 1600 करोड़ रूपये प्रति प्लेन खरीद रही है। इस हिसाब से यह सौदा दोगुनी से ज्यादा कीमत पर करीब 60 हजार करोड़ रूपये में हुआ है।

राफेल डील में मोदी सरकार ने करीब दुगुने दाम पर विमान खरीदे

मोदी सरकार ने भारत को मिलने वाली टैक्नोलॉजी पर भी समझौता किया। मेक इन इंडिया वाली शर्तों को हटा दिया जिससे विमान कंपनी की मौज हो गई। कंपनी ने बड़ा फायदा उठाया उससे शेयर बाजा़र में भी उसकी मौज हो गई। इस सौदे में मुकेश और अनिल अंबानी को भी बड़ा फायदा हुआ।

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जानकारी के मुताबिक विमान बेचने वाली कंपनी में अंबानी भी हिस्सेदार हैं। जब इतने सवाल हों तो सरकार का फर्ज है कि जनता के बीच सचाई लेकर आए। उन्हें इन सभी विंदुओं पर सफाई देना चाहिए। सरकार को बताना चाहिए कि क्यों ऐसी डील की।

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