कन्हैया कुमार के इस वीडियो को देखते ही भक्त आ गए अपनी असली औकात पर

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जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार एक स्टार की तरह उभरकर सामने आये है, क्योंकि इन्होने जो मुद्दे उठाये है वह देश के हित में है। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर इनके नारों को खूब पसंद किया जाता है। जेएनयू के छात्र कन्हैया कुमार एक क्रांतिकारी नेता बन चुके है जो भारत में दलितों और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए नजर आते है। पूरे देशभर में जेएनयू के छात्र आये दिन सुर्ख़ियों में बने रहते है। अभी हाल ही में एबीवीपी के गुंडों के साथ लड़ाई होने के बाद जेएनयू के छात्र नजीब अहमद अभी तक गायब है जिन्हें सरकार और पुलिस ढूँढने में नाकाम रही है। लेकिन फिर भी जेएनयू के छात्र नजीब के लिए इंसाफ की जंग लड़ रहे है।

 

कन्हैया कुमार भक्तों की फर्जी देशभक्ति की पोल खोलते ही रहते है इसलिए उन्हें सोशल मीडिया में गाली देने वाले दस्ते लगातार माँ-बहन की गाली देते रहते है। लेकिन फिर भी कन्हैया कुमार अपने मकसद से पीछे नहीं हटे है। कन्हैया कुमार भाजपा की गंदी राजनीति की भी पोल खोलते रहते है और अभी उन्होंने अपने एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि, “पूरे देश के अंदर चल क्या रहा है एक विधायक है भाजपा का, उसने कहा कि जेएनयू में बहुत बलात्कार होते है और इसके साथ यह भी कहा कि, जेएनयू एक अपराधिक गतिविधियों का एक अड्डा बन चुका है।”

कन्हैया कुमार ने उसका नाम अज्ञानदेव बेहूदा बताया और कहा कि, इस देश के अन्दर राजनीति का पतन जिस तरीके से हुआ है। वो अपेक्षित था और अपेक्षित इसलिए था कि, जिनको राजनीति में जाना चाहिए था वह अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर सिर्फ अपने काम-धंधों से मतलब रखे और राजनीति को उन्होंने नकारे लोगों के भरोसे पर छोड़ दिया। कन्हैया कुमार ने बताया कि, राजनीति में भाषा ऐसी हो गई है कि, उत्तर प्रदेश में एक नेता ने कहा कि, मोदी जी बच्चा पैदा नहीं कर सकते। इसके जवाब में भाजपा के नेता ने जवाब दिया कि, आप अपनी बेटी को भेज दीजिये। राजनीति में इतनी गन्दी भाषा का प्रयोग होने लगा है और “शर्म आती है कि, ऐसे लोग हमारे नेता है, शर्म आती है ऐसे लोग हमारे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री है।”

कन्हैया कुमार ने बताया कि, अगर हम को यह लग रहा है कि, हम राजनीति को छोड़कर समाज में बदलाव लायेंगे तो यह सबसे बड़ा बचकाना है। इसलिए फिर चाहे वह यूथ हो छात्र हो, पूरी मजबूती के साथ हमें आगे बढ़-चढ़कर राजनीति में हिस्सा लेना चाहिए। क्योंकि नमक-तेल से लेकर पोलियो टिका से लेकर मलेरिया के टिके तक क्या सही है और क्या गलत, क्या खाना है क्या पीना है, किसको पढ़ना है और किसको नहीं पढ़ना है। जब ये तमाम चीजे राजनीति से तय हो रही है तो हमको अपनी राजनीति तय करनी पड़ेगी और ये बात आज हमको समझनी होगी। इस देश के युवा को समझने की जरुरत है कि, इस देश के युवाओं की संख्या अगर 65 फीसद है तो उनके नेता 65 की उम्र से पार कैसे है? कन्हैया कुमार ने बताया कि, हम उन लोगों को अपनी मुहीम में शामिल करना चाहते है जो सच को सच और गलत को गलत मानते है। भारत एक लोकतान्त्रिक देश है और भारत के अंदर अगर शासन होगा तो संविधान के हिसाब से होगा।

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