जानिए संघी क्यों लगाते हैं ‘जय श्री राम’ का नारा, कन्हैया का सनसनीखेज खुलासा

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कन्हैया कुमार ने फिर से आरएसएस पर हमला बोलते हुए अपने एक प्रोग्राम के दौरान उन्होंने बताया कि, ‘आज मुझे जिस विषय पर बोलने के लिए बुलाया गया है, लेकिन हमारे बीच ऐसे भी लोग मौजूद है जो इस पर बहुत एक्सपर्ट है। जब लोग धर्म और जाति से ऊपर उठकर सोचने के लिए तैयार नहीं है, तो हमें इस विषय पर गंभीर विचार-विमर्श करने की जरुरत है। क्योंकि जो हम लोग बोलते है वह समाज में लोगों को समझ में नहीं आता है। दिक्कत ये नहीं है कि, उन्हें समझ में नहीं आ रहा है, बल्कि असल दिक्कत तो यह है कि, हम ही उन्हें समझा नहीं पा रहे हैं।’

कन्हैया कुमार ने बताया कि, मैं धार्मिक नहीं हूँ और मुझे धर्म से भी कोई लेना देना नहीं है। कन्हैया कुमार ने बताया कि, एक बात मैं हमेशा समझने की कोशिश करता हूँ और वह यह है कि, जय श्री राम और राम राम में क्या अंतर है? कन्हैया कुमार ने बताया कि, ‘जय श्री राम के नाम पर हिन्दू आतंक को फैलाया जा सकता है और राम-राम के नाम पर आतंक नहीं फैलाया जा सकता है। राम सबरी का बेर खा रहे हैं, उस राम की तस्वीर आरएसएस को नहीं भाति है, लेकिन वो धनुष ताने हुए राम की तस्वीर भा रही है। क्योंकि इस बात के लिए तैयार है कि, किसी की भी गर्दन उड़ा देंगे।’

 

कन्हैया कुमार ने बताया कि, ये जो अपने राजनीतिक फायदे के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं अपने आर्थिक फायदे के लिए इस बात को समझना बहुत ही आवश्यक है। कन्हैया ने भाजपा और संघियों की पोल खोलते हुए बताया कि, उनके राजनीतिक और आर्थिक कारणों का पता इस बात से लगाया जा सकता है कि, आखिर क्यों उन्हें इजरायल अच्छा लगता है? और कहते है कि, फिलिस्तीनियों को मारकर भगा देना चाहिए। आखिर क्यों ये लोग हिटलर और मुसोलिनी जैसे लोगों को अपना आदर्श समझते हैं। कन्हैया कुमार ने बताया कि, धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले ऐसे लोग फायदा उठाते है जो झूठ बोलने वाले लोग है जो इस देश का प्रधानमंत्री बना हुआ है। ऐसे लोग धर्म के नाम पर राजनीति करके फायदा उठाते हैं।

कन्हैया कुमार ने संघियों की पोल खोलते हुए कहा कि, ‘जब हम कहते है कि, हमारे देश में लोकतंत्र है किसी को भी गोली नहीं मारी जाएगी। लेकिन जो भी गोली मारेगा उसे जेल में डाल दिया जायेगा और उसकी मंदिर नहीं बनाया जायेगा। लेकिन संघियों ने गोडसे की मंदिर बनाई हुई हैं, क्योंकि आप गोली मारने और गोली चलाने की संस्कृति में विश्वास रखते हैं। इसलिए जो राम जी की जो तस्वीर है वो सबरी के साथ नहीं है बल्कि, धनुष उठाये हुए राम है। ये कोई धर्म नहीं कहता है कि, आप अपने राजनीतिक फायदे के लिए किसी दुसरे धर्म के लोगों की जान ले ले।’

 

 

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