गुजरात में GST ने तोड़ी व्यापारियों की कमर, व्यापारी बोले- 40 साल लगे थे बनाने में 40 दिन में सब खत्म हो गया

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गुजरात को पूरे देश में व्यापार के लिए जाना जाता है और खासकर कपड़े के व्यापार के लिए। गुजरात का सूरत शहर इस व्यापार का गढ़ है।

नोटबंदी और जीएसटी के बाद इस व्यापार पर भी काफी असर पड़ा। जीएसटी जैसे मुश्किल टैक्स सिस्टम के खिलाफ जुलाई में व्यापारियों ने सूरत में एक बड़ी रैली भी निकाली थी। जीएसटी से सम्बंधित परेशानियाँ अभी भी ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। आने वाले गुजरात चुनाव में इसका क्या असर होगा? ये ही जानने के लिए NDTV के पत्रकार सूरत के कपड़ा बाज़ार में पहुंचे।




जीएसटी के बारे में बात करते हुए बाज़ार संघ के पूर्व अध्यक्ष कहते हैं, “जबसे जीएसटी लगी है यहाँ व्यापारी न जीने में हैं और न मरने में। बहुत से व्यापारी हैं जो खुद को असमर्थ समझ रहे हैं और सोच रहे हैं कि हम कपड़े का व्यापार कैसे करें।”

उन्होंने कहा कि जीएसटी में बहुत से अंकुश हैं। इस व्यापार को इस स्तर पर लाने में 40 साल का समय लगा है और आज हमारी कपड़े की गुणवत्ता चीन को भी मात दे रही है।




जीएसटी की जटिलताओं पर बात करते हुए पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि ये बहुत ही मुश्किल है। पूरा दिन पेपर लिए चार्टेड एकाउंटेंट के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में हमारे व्यापर का क्या होगा?

उन्होंने कहा कि जीएसटी से पैदा हुई परेशानियों के कारण इस क्षेत्र में काम करने वाले पांच लाख मज़दूरों की भी नौकरियों पर खतरा पैदा हो रहा है।

चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि अगर कपड़ा व्यापार पर लगी 5% की कर दर को हटाया नहीं गया तो इस बार के चुनाव में व्यापारी वर्ग नरेंद्र मोदी का साथ नहीं देगा।

वहीँ खड़े एक अन्य कपड़ा व्यापारी जीएसटी के बारे में बताते हुए कहते हैं कि इस मार्केट में जीएसटी से पहले प्रतिदिन चार करोड़ मीटर कपड़ा बनता था लेकिन आज केवल 1.5 करोड़ बन रहा है। आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कितने मज़दूरों ने अपनी नौकरियां खोई हैं। विधानसभा चुनाव के बारे में उन्होंने कहा, “भाजपा का समय अब जा चुका है।”

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इस बाज़ार की ‘दिल्ली वाले पहलवानजी’ नाम से मशहूर छोले भठूरे की दूकान के मालिक बाज़ार की स्तिथि के बारे में बताते हैं। “बाज़ार में उत्पादन कम हुआ है, इस कारण दूसरे राज्यों के व्यापारी और खरीदार कम आ रहे हैं। इसका असर हम पर भी पड़ा है।” राज्य के चुनाव के बारे में वो कहते हैं कि भाजपा को लेकर अभी कुछ भी साफ नहीं है।

इसी दुकान में खड़े कुछ व्यापारी कहते हैं कि हम भाजपा के साथ हैं और इस चुनाव में उसे जितएंगें भी। लेकिन जीएसटी की जटिलताओं की शिकायत ये लोग भी करते हैं। इन व्यापारियों ने बात करते हुए ये भी माना कि ये “हकीकत है कि छोटे व्यापारी भाजपा को वोट नहीं देंगें।”

इस ग्राउंड रिपोर्टिंग से ये तो पता चलती है कि जीएसटी ने सूरत के कपड़ा व्यापर को भारी झटका दिया है। कपड़ा उत्पादन का आधे से भी कम होना व्यापारियों की कमर तोड़ने जैसा है और इसका खामियाज़ा मज़दूर भी चुका रहे हैं।

हालांकि, अभी भी कुछ गिने-चुने लोग भाजपा के समर्थन में नज़र आ रहे हैं। लेकिन आगामी चुनाव की तस्वीर साफ़ नहीं है, भाजपा का समर्थन कम हुआ है, भाजपा के खिलाफ गुस्सा भी साफ़ नज़र आ रहा है।

Courtsey: Bolta Hindustan

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