मौलवी ने कहा, ‘बिकिनी और अंडरवियर पहन के बहस करने आओ,’ एंकर का जवाब सुनने वाला है

381

मौलवी ने कहा, ‘बिकिनी और अंडरवियर पहन के बहस करने आओ,’ एंकर का जवाब सुनने वाला है

एक औरत को क्या करना चाहिए. ये सब आदमी तय करना चाहता है. वो चाहता है जैसा वो कहे, औरतें उससे ज्यादा कुछ न करे. इसके लिए कभी मज़हब की दुहाई दी जाती है. कभी संस्कृति खतरे में पड़ जाती है. दरअसल इसके पीछे मर्दवादी सोच होती है. पिछले दिनों में प्रियंका चोपड़ा और दंगल एक्ट्रेस फातिमा सना शेख को ट्रोल किया गया. उससे पहले प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण को भी. इसी ट्रोलबाज़ी पर मिरर नाउ टीवी चैनल में डिबेट थी. पैनल में मौलवी साहब को भी बैठाया गया था.

फातिमा सना को लेकर मौलाना यासूब अब्बास ने कहा,

‘आप डिबेट में बैठे हैं. आप बिकिनी में, शेमलैस गाउन में आइए, डिबेट में अंडरवियर पहनकर आइए. तब आदमी और औरत बराबर हो जाएंगे.’

इसके जवाब में एंकर फाये डिसूज़ा कहती हैं, ‘मौलाना जी आपने फंडामेंटली बड़ी सही बात कही है. लेकिन किसी को किसी से कुछ पूछना नहीं होता हमारे देश में कि वो क्या पहने? जिसको जो पहनना है वो पहने, बिकिनी पहनना है, पहने. देश में पूरी आज़ादी है.’

इसके बाद मौलाना फिर दोहराते हैं, ‘मैं इनसे कह रहा हूं न अंडरवियर पहनके आएं, मर्द और औरत बराबर हो जाएंगे.’

मौलाना के इस बेहुदे बयान पर एंकर फाये डिसूज़ा बड़े ही इत्मिनान से पैनल में बैठे सब लोगों को दो मिनट के लिए चुप होने को बोलती हैं. ताकि मौलाना की बोलती बंद कर सकें. इसके बाद वो एकदम कर्रा जवाब देती हैं,

‘आपको बता दूं मौलाना जी! आप मुझे मेरे काम की जगह अंडरवियर में आने को बोल रहे हैं. ये वो जगह है जहां मैं काम करती हूं. ये मेरा मंदिर है. आप औरत और आदमी को बराबर करने के लिए अंडरवियर पहनके आने को कह रहे हैं. आप मेरे पैनल का धैर्य खत्म करने बारे में सोच रहे हैं. आप जैसे मैंने बहुत देखे हैं. मैं आप से नहीं डरती. मैं आपके धमकाए में नहीं आ सकती और किसी से भी नहीं. मैं आपसे नहीं डर सकती. आप हमें हमारे काम से डराने की कोशिश कर रहे हैं. आपकी बातें बहुत शर्मनाक हैं. सना फातिमा अपनी जॉब कर रही हैं. आपके जैसे लोग उन्हें उनके काम से डराने की कोशिश कर रहे हैं. सानिया मिर्ज़ा अपनी जॉब कर रही हैं. प्रियंका चोपड़ा क्या पहनती हैं . सना फातिमा क्या पहनती हैं ये उनकी चॉइस है. आप चाहते हैं सब काम छोड़कर किचन संभाले. आप हमें डरा नहीं सकते.’

इसके बचाव में मौलाना तर्क देते हैं, ‘आप किस मौलाना को संबोधित कर रही हैं. हम तो मर्दों की बात कर रहे हैं. हम तो मर्दों को कह रहे हैं कि वो अंडरवियर पहनके आएं.’

 

चलिए मौलाना की बात को मान लेते हैं कि वो मर्दों के लिए कह रहे थे कि वो बहस में अंडरवियर पहनकर आकर बैठें. अब मौलाना ये बताएं कि क्या सब जगह एक जैसी ही ड्रेस पहनकर बैठा जाता है? अगर ऐसा है तो फिर क्यों कपड़ों पर खर्च करते हैं. एक ही जोड़ी कपड़े बनाएं और उन्हें ही सब जगह पहनकर जाएं. घर से लेकर बाहर तक. क्या ऐसा होता है कि जो कपड़ा घर में पहनके मौलाना सोते हैं वही मस्जिद में नमाज़ के लिए भी हो. क्या कभी ऐसा हुआ है कि जो घर में कपड़े पहने हो, वो हज के दौरान काबा का तवाफ़ करते हुए भी पहने जाएं. वहां के कपड़े अलग होते हैं न? तो फिर मौलाना साहब काहे आप सबको अंडरवियर पहनके डिबेट में बुला रहे हैं? हर जगह की अपनी वैल्यू होती है. और हर जगह एक जैसे कपड़े नहीं पहने जाते.

आपका ये बयान बेहूदा, शर्मनाक, और जहिलपने….(और शब्द डिक्शनरी में देख लेना) का सबूत लगता है. जिसके ज़रिये ये साबित करने की कोशिश है कि कोई फिल्म में क्या पहने वो भी आप जैसे लोग ही तय करें. क्यों न आप अपनी ज़िंदगी जीते. आपसे तो फातिमा सना या प्रियंका चोपड़ा नहीं कह रहीं कि आप ऐसी ड्रेस पहनें. वो अपना काम कर रही हैं. आप अपनी इबादत करिए. क्यों अपनी इबादत में खलल डाल रहे हैं. और क्यों उनको उनके काम से विचलित कर रहे हैं?

वीडियो भी देख और सुन लो

Our Sponsors
Loading...