लाइक, कमेंट, शेयर की भूख..विजेता जी आपने तो इंसानियत को शर्मिंदा कर दिया

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ऑरकुट से शुरू हुआ सोशल मीडिया का सफर अब फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम तक आ गया है. बात अगर सोशल मीडिया के इस्तेमाल की हो तो इसका उद्देश्य अपने परिचितों से जुड़ना था. सोशल मीडिया के वर्तमान स्वरूप पर बात करें तो आज ये एक प्रमुख पॉलिटिकल टूल है जिसके इस्तेमाल से सरकारें बन और बिगड़ रही हैं.’

 

आज के संदर्भ में ये कहना बिल्कुल भी अतिश्योक्ति न होगा कि अब सोशल मीडिया का उपयोग मन की बात को वॉल पर लिखने की अपेक्षा नफरत फैलाने और एक समुदाय को दूसरे समुदाय से लड़ाने के लिए किया जा रहा है. ध्यान रहे कि आज समाज में जो भी घटनाएं हो रही हैं उनसे जुड़ी बातों को समाज का एक बड़ा बुद्धिजीवी वर्ग, नमक मिर्च लगाकर अपने फेसबुक और ट्विटर पर डाल रहा है. सोशल मीडिया के इस दौर में लोगों की लाइक, कमेंट और शेयर वाली इच्छा मौजूदा परिस्थित्तियों में और कुछ नहीं बस आग में खर डालने का काम कर रही है जिससे हालात सुधरने के बजाए बद से बदतर होते जा रहे हैं.

भाजपा, सोशल मीडिया, फेसबुक जिस तरह से विजेता द्वारा ये तस्वीर पोस्ट हुई वो ये बताती है कि आज लोगों के दिल में कितनी नफरत भरी है

 

हरियाणा की भाजपा नेता विजेता मलिक ने अपनी फेसबुक वॉल पर भोजपुरी फिल्म के एक सीन की तस्वीर पोस्ट करते हुए उसे बंगाल में भड़के सांप्रदायिक दंगे से जोड़ दिया. तस्वीर को शेयर करते हुए विजेता लिखती हैं कि बंगाल में किस तरह से मुसलमान युवक हिंदू महिला का बलात्कार कर रहे हैं. विजेता मलिक हरियाणा राज्य की बीजेपी प्रदेश कार्याकारिणी की सदस्य भी हैं.

 

अपने पोस्ट में भोजपुरी फिल्म के एक तस्वीर को क्रॉप कर विजेता ने लिखा कि बंगाल में जो हालात हैं वो हिंदुओं के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय है. इस फेक तस्वीर पर लोगों की भावना से खेलते हुए विजेता ने ये भी लिखा कि ‘आखिर हिंदू को ही क्यों मारा जा रहा है और सरेआम उसकी इज्जत के साथ खेला जा रहा है’

अवार्ड वापसी गैंग को आड़े हाथों लेती दिखीं विजेता

अपनी इस तस्वीर से विजेता मालिक ने अवार्ड वापसी गैंग पर भी निशाना साधा है और लिखा है कि ‘इस पर कोई कुछ नहीं बोलता और ना ही अवार्ड वापस हो रहा है. ना तो देश छोड़ कर जाने की बात हो रही है.’

भाजपा, सोशल मीडिया, फेसबुक विजेता के इस कृत्य की न सिर्फ निंदा हो बल्कि पुलिस को भी इन पर उचित कार्यवाही करनी चाहिएक्या है तस्वीर की हकीकत

विजेता मलिक जिस तस्वीर के जरिये बंगाल में हिंदू महिला के रेप का प्रचार कर रही हैं वो वर्ष 2014 में आई भोजपुरी फिल्म ‘औरत खिलौना नहीं’ का एक दृश्य है. फिल्म के इस दृश्य में विलन द्वारा सरेआम किसी महिला की इज्जत को तार-तार किया जा रहा है.

संचार क्रांति ही है असल समस्या की जड़

विजेता की ये हरकत न सिर्फ निंदनीय है बल्कि ये बात इस ओर भी इशारा करती है कि सोशल मीडिया पर पब्लिसिटी पाने के लिए लोग हद से ज्यादा नीचे गिर रहे हैं. साथ ही ऐसी घिनौनी और कुंठित मानसिकता न सिर्फ समाज बल्कि सम्पूर्ण देश के लिए हानिकारक है.

आखिर विजेता ने ऐसा क्यों किया

हो सकता है ये प्रश्न आपको भी परेशान कर रहा हो कि आखिर सब कुछ जानते बूझते हुए विजेता ने ऐसा क्यों किया तो शायद इसका जवाब यही हो कि आज फेसबुक पर इधर-उधर का, यहां-वहां का परोस कर सस्ती लोकप्रियता और फॉलोवर पाए जा सकते हैं. हो ये भी सकता है कि विजेता अपनी जैसी मानसिकता वाले लोगों को ये एहसास दिलाना चाहती हों कि ‘तुम्हारे हितों का सबसे ज्यादा ध्यान हमें ही है और अच्छे से लेकर बुरे तक में हम सदैव तुम्हारे साथ हैं’.

न सिर्फ खुद को बल्कि पार्टी और पीएम मोदी तक को किया शर्मिंदा

जी हां, कहीं न कहीं आप भी इस बात से सहमत होंगे कि ऐसे नेताओं की वजह से न सिर्फ पार्टी बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक की छवि धूमिल हो रही है. कहा जा सकता है कि एक तरफ प्रधानमंत्री सबको साथ लेकर चलने की बात कह रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ उनके कार्यकर्ता और पदाधिकारी अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे कि आम जानता के बीच उनकी छवि धूमिल होती रहे.

अंत में हम इतना ही कहेंगे कि जहां एक तरफ सम्पूर्ण भारत नफरत की आग में जल रहा है तो वहीं दूसरी ओर नेताओं के ऐसे कृत्य ये बताने के लिए काफी हैं कि लाशों पर रोटी सेकना इनके लिए कोई नई बात नहीं है. ये पहले भी ऐसा करते आए हैं, आज भी कर रहे हैं और शायद भविष्य में भी ये यही करते हुए अपनी राजनीति करेंगे. साथ ही हम पार्टी, पीएम मोदी और पुलिस से भी यही उम्मीद रखते हैं कि वो मामले का संज्ञान लेकर विजेता और इनकी मानसिकता के लोगों के विरुद्ध उचित कार्यवाही करेंगे.

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