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प्रधानमंत्री की जुमलेबाजी से पूरा देश परेशान, ये हैं वे 10 झूठे वादे जिस पर जनता जवाब मांग रही है

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मोदी जी ने सत्ता हासिल करने के लिए गुजरात को विकास माडल  के तौर पर पेश किया था। चुनाव के दौरान उन्होंने तमाम झूठी कहानिया सुनाई मसलन चाय बेचीं माँ ने बर्तन साफ़ किये और गरीबी में पीला बढे शिक्षा पूरी नहीं कर सके वगैरह वगैरह पर उनके सारी बाते हवा हवाई निकली जिस गुजरात आए हैं तो वहां की सड़कों से लेकर किसानों की हालत, बेरोज़गार युवा, बिना बिजली के गाँव, कमज़ोर स्वास्थ्य व्यवस्था और न पूरे हुए राजनीतिक वादों की हकीकत सामने आ रही है। इसीलिए भाजपा वहाँ सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है।



ये वो वादें हैं जो मोदी ने 2007 गुजरात विधानसभा चुनाव में किया था लेकिन पूरे अभी तक नहीं हुए।

  • सरदार सरोवर बाँध: भाजपा ने इस बाँध को 2010 में पूरा करने का वादा किया था कि लेकिन अभी तक बाँध की 40% ही छोटी नहरों का काम पूरा हो पाया है और उससे छोटी नहरें केवल 25% ही बन पाई हैं।

 

  • बिजली आपूर्ति: राज्य में अभी भी बिजली कनेक्शन के तीन लाख से ज़्यादा आवेदन पत्र लंबित हैं। अभी तक राज्य सरकार केवल 8 से 14 घंटे ही बिजली दे पा रही है। इसी वर्ष 2 अगस्त को पीएम मोदी ने राज्य के एक लाख से ज़्यादा ग्रामीण परिवारों को बिजली देने का वादा किया था, जो अभी तक अँधेरे में जीवन बिता रहे हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक गुजरात के 11 लाख घरों में बिजली नहीं है। जिसमें से 9 लाख ग्रामों में हैं।

 

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  • पीने का पानी: नर्मदा द्वारा राज्य में 9,633 गाँवों को पीने के पानी की सप्लाई देने का वादा किया गया था लेकिन अभी तक केवल 7,071 गाँवों को ही सप्लाई मिल पाई है। उसमे से भी सौराष्ट्र और कच्छ के गाँवों में सप्लाई पूरी तरह से नहीं हो पा रही है। इसके आलावा अभी तक पानी सप्लाई के लिए 1600 सहकारी समितियां ही बन पाई हैं जबकि लक्ष्य 4500 बनाने का था।
  • गरीबी से निकालना: नरेंद्र मोदी ने ये वादा किया था कि वो गुजरात के गाँवों से गरीबी को ख़त्म कर सभी बीपीएल परिवारों को उस श्रेणी से बहार निकाल लेंगे। वर्ष 2000 में गुजरात के गाँवों में 23 लाख बीपीएल परिवार थे जिनकी संख्या 2012 में घटने के बजाए बढ़कर 30 लाख हो गई थी। अभी भी ग्रामों में बीपीएल परिवारों की संख्या 9 लाख से ज़्यादा है।
    • गरीबों के लिए घर: ये वादा किया गया था कि भाजपा राज्य में बेघरों के लिए प्रतिवर्ष दो लाख घर बनाएगी। लेकिन आकड़ों के अनुसार राज्य में केवल प्रतिवर्ष 10 हज़ार घर ही बन सकें। उसमें भी घरों के लिए भाजपा केंद्र सरकार की इंदिरा आवास योजना पर ही निर्भर रही।

     

    • लिंग अनुपात: भाजपा का वादा था कि वो लिंग अनुपात को 1000 पुरुषों के मुकाबले 950 महिलाओं पर पहुंचा देगी। 2011 की जनगड़ना के मुकाबले गुजरात में लिंग अनुपात 1000 पुरुषों पर 918 महिलाओं का है।

     

    • मातृ मृत्यु दर: इसकों भी कम कर प्रति 1000 महिलाओं पर 50 करने का वादा किया गया था। अभी भी गुजरात देश का वो छठा राज्य है जहाँ मातृ मृत्यु दर सबसे ज़्यादा है। 2012 के आकड़ों के मुताबिक ये प्रति 1000 पर 148 है। राज्य के आदिवासी इलाकों में इसकी संख्या ज़्यादा है। जानकारी के मुताबिक इसका कारण वहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है।

     


    • विशेष आर्थिक क्षेत्र: 2004 में SEZ बिल लाकर भाजपा ने हर ज़िले में एक विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने का वादा किया था। लेकिन अभी तक केवल 13 ही बन पाए हैं। उनमें भी ज़्यादातर डेवलपर ने अपने हाथ खीच लिए हैं।
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