इंसानियत: सुप्रीमकोर्ट ने दी रोहिंग्या मुसलमानों को बड़ी राहत, मोदी सरकार को लगा बड़ा झटका

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रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस म्यांमार भेजने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रोहिंग्या मामला मानवता का बड़ा मुद्दा है। ये मानवीय समस्या है। कोर्ट इस मामले में भावनाओं के आधार पर फैसला नहीं लेगा। इस मामले में कानूनी सिद्धांतों पर चलेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक हित, लेबर हित और भौगोलिग पहलुओं पर विचार करना होगा।

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बच्चों, महिलाओं और अक्षम लोगों की सुरक्षा पर भी विचार करना है। राज्य की भूमिका चौतरफा होती है और ये मानवीय होनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति अपने कार्य से आतंकी है तो उस पर कार्रवाई हो, लेकिन बेकसूर परेशान ना हों।

कोर्ट ने सरकार से कहा कि किसी आकस्मिक हालात का मौका ना दें। अगर सरकार रोहिंग्या को वापस भेजें तो याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं। 21 नवंबर को अगली सुनवाई होगी, हालांकि कोर्ट पहले चाहता था कि वह रोहिंग्या को वापस भेजने के फैसले पर 21 नवंबर तक रोक लगाए लेकिन केंद्र ने कहा कि ऐसा कोई आदेश ना दें, जिसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर पड़े।

रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इससे पहले केंद्र सरकार ने रोहिंग्या घुसपैठियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और हलफ़नामा दायर किया था। केंद्र सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा है कि रोहिंग्या को वापस म्यांमार भेजने का फ़ैसला परिस्थितियों, कई तथ्यों को लेकर किया गया है जिसमें राजनयिक विचार, आंतरिक सुरक्षा, कानून व्यस्था, देश के प्रकृतिक संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ और जनसांख्यिकीय परिवर्तन आदि शामिल है।

केंद्र सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा कि रोहिंग्या ने अनुछेद 32 के तहत जो याचिका दाखिल है कि वो सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि अनुछेद 32 देश के नागरिकों के लिए है न कि अवैध घुसपैठियों के लिए। केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा कि कुछ रोहिंग्या देश विरोधी और अवैध गतिविधियों में शामिल है जैसे हुंडी, हवाला चैनल के जरिये पैसों का लेनदेन, रोहिंग्यो के लिए फर्जी भारतीय पहचान संबंधी दस्तावेज़ हासिल करना और मानव तस्करी।

रोहिंग्या अवैध नेटवर्क के जरिये अवैध तरीके से भारत में घुसाते है। बहुत सारे रोहिंग्या पेन कार्ड और वोटर कार्ड जैसे फर्जी भारतीय दस्तावेज हासिल कर चुके हैं। केंद्र सरकार ने ये भी पाया है ISI और ISIS और अन्य चरमपंथी ग्रुप बहूत सारे रोहिंग्यो को भारत के संवेदनशील इलाकों में साम्प्रदायिक हिंसा फैलाने की योजना का हिस्सा है।

केंद्र सरकार ने अपने हलफ़नामे में ये भी कहा था कि भारत में जनसंख्या बहूत ज्यादा है और सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक ढांचा जटिल है ऐसे में अवैध रूप से आए हुए रोहिंग्यो को देश में उपलब्ध संसाधनों में से सुविधाएं देने से देश के नागरिकों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा क्योंकि इससे भारत के नागरिकों और लोगों को रोजगार, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा से वंचित रहना पड़ेगा। साथ ही इनकी वजह से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और कानून व्यस्था में दिक्कत आएगी।

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