‘मोदी को वोट देने के लिए मां-बाप से किया था झगड़ा, PM मोदी ने दी लाठियां’

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वाराणसी। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में छात्राओं पर जुर्म और बर्बरियत की इंतेहा की गई. आधी रात में पुलिसिया जुल्म छात्राओं पर कहर बनकर टूट पड़ा. छात्राओं को ना सिर्फ दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया बल्कि उनके हास्टल में घूसकर उनके साथ मारपीट की गई. ये सब क्यों हो रहा था? क्या वजह थी कि पुलिस इन छात्राओं के लिए किसी शैतान की तरह हो गई. क्या छात्राओं का अपनी सुरक्षा मांगना गुनाह है? क्या छात्राओं के साथ छेड़छाड़ करने वाले लफंगों पर कार्रवाई की मांग करना गलत है?




ये सवाल बीएचयू के हर छात्र और छात्राएं पूछ रही हैं. कई छात्र खुलेआम सड़कों पर उतरकर इस कार्रवाई को हिटलरशाही और तानाशाही कह रहे हैं. हमनें कई छात्र और छात्राओं से बात की. उन छात्रों के अंदर गुस्सा था. साथ ही 2014 में नरेंद्र मोदी को वोट देने का पछतावा भी था. नाम न छापने की शर्त पर एक छात्र ने कहा कि 2014 में मोदी को वोट देने के लिए हमनें मम्मी-पापा से बहस की थी. उनको समझाया था कि अच्छे दिन आएंगे, लेकिन पीएम मोदी ने ना तो हमारी बात सुनी, ना हमारे मांगों को जाना, अलबत्ता योगी की पुलिस हमे उपर लाठीचार्ज कर गई.




एक अन्य छात्र ने कहा कि हम इंसाफ मांग रहे थे. बाहरी लोग कभी भी आकर छात्रों से मारपीट करते हैं. छात्राओं के साथ छेड़खानी करते हैं. लेकिन बीएचयू प्रशासन हमारी मांगों पर कार्रवाई करने की बजाय आरोपियों को खुली छूट दे रही है. हम सिर्फ कार्रवाई की मांग कर रहे थे लेकिन हमें लाठीचार्ज मिली.

दरअसल छात्र-छात्राओं के अंदर लाठीचार्ज के बाद एक डर सा है. उनको डर है कि बीएचयू प्रशासन उनपर कोई कार्रवाई ना कर दे. क्योंकि नाम छापे जाने पर सीधे उन्हीं छात्र और छात्राओं को टारगेट कर लिया जाएगा.

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