GST लागू होने पर बिजनेस होगा डाउन, तीन दिन तक 50 हज़ार दुकानें रहेंगी बंद

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1 जुलाई से लागू होने वाले GST को लेकर पत्रकार रवीश कुमार ने एक स्पेशल रिपोर्ट तैयार की है। GST लागू होने से क्या नुक्सान और क्या फायदे होंगे, इस रिपोर्ट में पढ़े। पत्रकार रवीश कुमार के मुताबिक राज्यसभा में जिस एकता और सद्भावना पर लोग भावुक हुए जा रहे हैं, वह दरअसल इसलिए भी है कि आर्थिक नीतियों के मामले में अब सारे दल एक जैसे हैं – ख़ासकर बीजेपी और कांग्रेस।

जब नीतियों में ही कोई अंतर नहीं था, तो दलीलें कहां से टकरातीं। राज्यसभा में वित्तमंत्री अरुण जेटली और पूर्व वित्तमंत्री पी चिदम्बरम की भाषा और देहभाषा ऐसी थी, जैसे दोनों एक ही चैप्टर पढ़कर आए हों और उसे अपना पर्चा बताने का प्रयास कर रहे हों।

दोनों के भाषणों में चंद भाषाई असहमतियों के साथ व्यापक सहमति का इज़हार हो रहा था। यही कारण है कि आर्थिक नीति के वक्त सदन की एकता अभूतपूर्व लगती है। यह एकता नहीं है, हमारी दरिद्रता है। एक भी दल जीएसटी के विरोध में कोई ठोस तर्क नहीं रख पाया, सब पैबंद जोड़ रहे थे।

इसलिए पेश किया GST
GST को GDP बढ़ाने, रोज़गार बढ़ाने और ग़रीबी दूर करने के पैकेज के रूप में पेश किया गया है। एक जागरूक लोकतंत्र में होना यह चाहिए था कि सरकार को सदन और सदन के बाहर बताना चाहिए कि दुनिया में कहां-कहां ऐसा हुआ है और उसका आधार क्या है। जहां जीएसटी लागू है, उनमें से किस देश की जीडीपी भारत की जीडीपी के बराबर है, जहां जीएसटी नहीं है, वहां भी।

मैकिन्जी ग्लोबल इंस्टीट्यूट ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में बताया है कि 2005 से 2014 के बीच दुनिया की 25 विकसित अर्थव्यवस्थाओं में दो-तिहाई परिवारों की वास्तविक आय घटी है या जस की तस रह गई है, जिसके गंभीर आर्थिक और सामाजिक परिणाम हो सकते हैं। सिर्फ दो प्रतिशत परिवारों की वास्तविक आय बढ़ी है। यही बात तमाम अर्थशास्त्री कह रहे हैं। तमाम मुल्कों में देखा गया है कि मुल्क की 50 फीसदी संपत्ति कोई 100-50 लोगों के हाथों में जमा हो गई है।

भारत में जीएसटी के देरी से लागू होने पर रोने की भी ज़रूरत नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में 1975 से चर्चा शुरू हुई और लागू हुआ सन 2000 में। वहां भी कांग्रेस-बीजेपी की तरह लेबर और कंज़र्वेटिव पार्टी अपना स्टैंड बदलते रहे। कंज़र्वेटिव पार्टी ने तो मेनिफेस्टो से जीएसटी निकाल दिया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद लागू करने में ही जुट गई।

भारत जिस जीएसटी को ऐतिहासिक बता रहा है, वह सबसे पहले फ्रांस में 1954 में लागू हुआ था। इसी अप्रैल में मलेशिया ने जीएसटी लागू किया है। न्यूज़ीलैंड का जीएसटी दुनियाभर में बेहतरीन माना जाता है, वहां 1986 में लागू हुआ। 1991 में कनाडा और दक्षिण अफ्रीका में लागू हो चुका है। 140 से ज़्यादा देश जीएसटी लागू कर चुके हैं. अमेरिका में जीएसटी नहीं है।

तीन दिन तक 50 हज़ार दुकानें रहेंगी बंद
जीएसटी के तहत फर्नीचर पर 28 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाए जाने के विरोध में दिल्ली में फर्नीचर निर्माताओं ने सोमवार से अपनी दुकानें तीन दिन के लिए बंद रखने का ऐलान किया। विरोध प्रदर्शन का आयोजन कर रही दिल्ली फर्नीचर फेडरेशन ने कहा कि यह सरकार की ओर से की गई सरासर नाइंसाफी है।

सरकार ने अस्पताल, कार्यालय, स्कूल और घरों में आम लोगों द्वारा इस्तेमाल में लाए जाने वाले फर्नीचर पर 28 प्रतिशत टैक्स लगाया है, जबकि हीरा जैसी विलासिता की वस्तुओं पर केवल तीन प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। फेडरेशेन के अध्यक्ष रतिंदर पाल सिंह भाटिया ने पत्रकारों से कहा, ‘हमने सरकार से फर्नीचर पर प्रस्तावित ऊंची दर में संशोधन करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।’

मौजूदा समय में फर्नीचर पर 12 प्रतिशत कर लगता है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने फर्नीचर आयात पर आयात शुल्क घटाकर इसे सस्ता करके घरेलू फर्नीचर निर्माताओं की परेशानी और बढ़ा दी है।

 

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