हार्दिक पटेल ने कसा तंज, ‘आधार कार्ड को स्विस बैंक के खातों से कब जोड़ा जाएगा?’

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अहमदाबाद
आधार कार्ड को बैंक अकाउंट से जोड़ने के सरकार के फैसले पर गुजरात में पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने तंज कसा है। ट्विटर पर हार्दिक ने लिखा है, ‘मैं सोच रहा हूं कि आधार कार्ड को स्विस बैंक के खातों से कब जोड़ा जाएगा?’





हार्दिक ने ट्वीट किया, ‘सुरेंद्र नगर में आरक्षण, किसान और बेरोजगार के मुद्दे पर लाखों लोगों की मौजूदगी मुझे लड़ाई को मजबूती से चलाने के लिए मजबूर करती है। लोगों में सरकार के खिलाफ बहुत गुस्सा है। यह लोग मेरे साथ नहीं, मुद्दों की लड़ाई के साथ हैं।’




निशाने पर बीजेपी
पटेल का कहना है कि आधार कार्ड को मोबाइल और बैंक अकाउंट से जोड़ने को अनिवार्य बनाकर सरकार बेरोजगारी जैसे अहम मुद्दे से लोगों का ध्यान भटका रही है। दरअसल गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ हार्दिक पटेल मैदान में पूरी तरह उतर आए हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ कथित मुलाकात और अन्य कांग्रेसी नेताओं के साथ मीटिंग से इसके संकेत भी मिल रहे हैं।

गौरतलब है कि हार्दिक ने यह ट्वीट ब्लैक मनी को लेकर बड़ा खुलासा होने से कुछ घंटे पहले किया है। यह खुलासा जर्मनी के जीटॉयचे साइटुंग नामक उसी अखबार ने किया है जिसने 18 महीने पहले पनामा पेपर्स का खुलासा किया था। 96 मीडिया ऑर्गेनाइजेशन के साथ मिलकर इंटरनैशनल कॉन्सोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) ने ‘पैराडाइज पेपर्स’ नामक दस्तावेजों की छानबीन की है।

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लिस्ट में 714 भारतीयों के नाम
‘पैराडाइज पेपर्स’ में 1.34 करोड़ दस्तावेज शामिल हैं। इस खुलासे के जरिये उन फर्मों और फर्जी कंपनियों के बारे में बताया गया है जो दुनिया भर में अमीर और ताकतवर लोगों का पैसा विदेशों में भेजने में उनकी मदद करते हैं। पैराडाइज पेपर्स लीक में पनामा की तरह ही कई भारतीय राजनेताओं, अभिनेताओं और कारोबारियों के नाम सामने आए हैं।

इस लिस्ट में कुल 714 भारतीयों के नाम शामिल हैं। वहीं दुनिया भर की बात करें तो इस लिस्ट में कुल 180 देशों के नाम हैं। इस लिस्ट में भारत 19वें नंबर पर है। जिन दस्तावेजों की छानबीन की गई है, उनमें से ज्यादातर बरमूडा की लॉ फर्म ऐपलबाय के हैं।

119 साल पुरानी यह कंपनी वकीलों, अकाउंटेंट्स, बैंकर्स और अन्य लोगों के नेटवर्क की एक सदस्य है। इस नेटवर्क में वे लोग भी शामिल हैं जो अपने क्लाइंट्स के लिए विदेशों में कंपनियां सेटअप करते हैं और उनके बैंक अकाउंट्स को मैनेज करते हैं।

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