सूरत के हीरा व्यापारियों को फरमान-मोदी की रैलियों में फैक्ट्री मजदूरों को ले जाकर भरो खाली कुर्सियां

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नई दिल्ली– गुजरात के सूरत शहर में आज मोदी की रैली है। रैली में खाली पड़ी कुर्सियों को देखकर मोदी-शाह के होश उड़ गए। वहीं हार्दिक की जनसभा में जनसैलाब उमड़ा जिसे देखकर परेशान मोदी ने रैली में खाली कुर्सियां भरने के लिए सूरत के हीरा कारोबारियों को सूची देकर फैक्टरियों से लोगों को रैली में भेजने का फरमान जारी किया गया है।


पीएम मोदी की सूरत रैली के साथ ही गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पहले दौर के प्रचार पर वह विराम लगाएंगे। पीएम मोदी की पहली रैलियों में गजब की भीड़ देखने को मिलती थी। जबकि अब हाल मोदी की रैलियों का बुरा होने लगा है। जबकि अब होने वाली रैली में कुर्सियां खाली पड़ी रहती हैं। पिछली तमाम रैलियों में भीड़ कम होने की वजह से बीजेपी नेतृत्व ने सूरत रैली को सफल बनाने के लिए सारे पत्ते खोल दिए हैं।

खासतौर पर धानधुखा और दाहोद में मोदी की रैलियों में खाली कुर्सियों और लोगों द्वारा कथित तौर पर फेंकू-फेंकू चिल्लाने के वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद से बीजेपी नेतृत्व ने सारा जोर आज की रैली को सफल बनाने पर लगा दिया है।

हीरे व्यापारियों और टेक्सटाइल व्यापारियों के साथ बैठक

खाली पड़ी कुर्सियों को भरने के लिए भाजपा ने आनन-फानन में बैठक बुलाई। बीजेपी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष जीतू वाधानी ने हीरे व्यापारियों और टेक्सटाइल व्यापारियों के साथ बैठक की।

एक बड़े हीरे व्यापारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इस बैठक में यह आश्वासन दिया गया कि 18 दिसंबर को जो जीएसटी काउंसिल की बैठक होनी है, उसमें इन व्यापारियों की तमाम परेशानियों का हल निकाल लिया जाएगा। कहा जा रहा है कि बस वे पार्टी का विरोध करना बंद कर दें। ये सारे व्यापारी पाटीदार समाज के थे और इन्होंने अभी तक तकरीबन खुलकर हार्दिक पटेल का समर्थन किया था।

कहां हुई ये बैठक-

खबर है कि यह बैठक किरण हॉस्पिटल में हुई। गौरतलब है कि अस्पताल पाटीदार आरोग्य ट्रस्ट का है, जिसका विमोचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल में किया था। इसके बाद इन व्यापारियों को एक लिस्ट दी गई, जिसमें यह लिखा था कि किसे अपने कितने कर्मचारी आज 7 दिसंबर की सूरत रैली के लिए लाने हैं। इसे फिर बाकी छोटे व्यापारियों को बांटा गया।




इतना ही नहीं यह भी योजना बताई गई है कि कौन किस चौराहे पर अपनी फैक्ट्री के कितने मजदूरों को बीजेपी के खेस (कमल छाप मफलर) के साथ लेकर आएगा। प्रमुख रूप से ये उन्ही इलाकों में मजदूरों को जुटाएंगे, जहां फैक्ट्रियां हैं। इस तरह से आज बीजेपी समर्थक मालिकों की फैक्ट्रियों में काम नहीं होगा, या आधे दिन का काम होगा।

माना जा रहा है कि मोदी किसी भी तरह अपनी रैली में खाली कुर्सी पड़ी नहीं देखना चाहते। जिसके लिए उन्होंने आला-अधिकारियों को आनन-फानन में बैठक कर ये आदेश दिया कि किसी भी तरह खाली कुर्सी न रहें।

स्टोरी इनपुट- नवजीवन

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