यूपी के भाजपा नेता ने महिला से बदतमीजी करते हुए किया तुच्छ सवाल: विडियो

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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद गरीबों के अपमान की लगातार खबरें आ रही हैं। जिस वजह से विपक्ष योगी सरकार पर गरीब विरोधी होने का आरोप लगा रही है। इन आरोपों को तब और बल मिला जब गोरखपुर से बीजेपी विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल एक महिला पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आए।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी विधायक राधा मोहन दास सोमवार (29 मई) को संतकबीर नगर जिले के मगहर में पहुंचे थे, इस दौरान एक मह‍िला अपनी समस्याओं को लेकर उनके पास पहुंची। ख़बरों के अनुसार, महिलाओं ने उनसे सरकारी आवास की मांग की। इस पर विधायक ने एक महिला से पूछा, ‘तुम्हारे कितने बच्चे हैं?’ महिला ने बताया कि उसके दो बच्चे हैं। इसके बाद राधा मोहन ने महिला से फिर पूछा, ‘तुमने दोनों बच्चों को एक साथ पैदा किया था या एक-एक करके?’ जिसे सुनकर वहां पर मौजूद महिला समेत सभी अवाक रह गए।

प्रतीकात्मक तस्वीर.

विधायक ने कहा कि जब दो बच्चे एक साथ पैदा नहीं हो सकते तो आवास एक साथ कैसे मिल सकता है। इसी तरह समस्याएं भी धीरे-धीरे सुलझेगी। इसके बाद विधायक ने कहा कि आवास के लिए थोड़ा इंतजार करो, 2022 तक बारी-बारी सभी को आवास मिल जाएगा।

वहीं, मामला बढ़ता देख विधायक ने सफाई देते हुए कहा कि राजनीति में अगर संवादहीनता है तो आप अपनी बातें जनता तक नही पहुंचा सकते हैं। बहुत सामान्य तरीके से लोगों को समझाना पड़ता है, यह हंसी-मजाक के उदाहरण हैं। इसे टेढ़ा करके देखने की जरूरत नहीं। बता दें कि, विधायक राधा मोहन दास वहीं है जिन्होंने इससे पूर्व गोरखपुर में महिला आईपीएस चारू निगम से अभद्रता करने के आरोप में आलोचना झेल चुके हैं।

 

महिला आईपीएस चारू निगम के साथ खुलेआम बदतमीजी करने का आरोप है। महिला पुलिस अधिकारी ने आरोप लगाया कि उससे बदसलूकी की गयी जबकि विधायक ने इस आरोप से साफ इंकार किया। महिला आईपीएस अधिकारी को कथित तौर पर फटकार लगायी जिससे महिला अधिकारी रूआंसी हो गयी। बातचीत के दौरान ही महिला अधिकारी रूमाल निकालकर आंसू पोंछने लगीं थी।

करीमनगर क्षेत्र की थी, जहां कुछ लोग शराब की एक दुकान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने उन लोगों को वहां से हटाया था। इसी तनाव के बीच स्थानीय भाजपा विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल मौके पर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने उनसे शिकायत की कि पुलिस अधिकारी चारू निगम ने उन्हें जबरन हटाया था।

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