मोदी सरकार की ये कैसी देशभक्ति, शहीदों के बच्चों के शिक्षा फ़ंड में भारी कटौती

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नई दिल्ली: शहीदों की सबसे ज़्यादा गौरवगाथा गाने वाली  राष्ट्रवादी मोदी सरकार के इस फैसले से लोग चौंक रहे हैं। शहीदों के परिवार को ही आर्थिक चोट पहुँचाने वाला फ़ैसला हुआ है।

क्या है मामला

युद्ध में मारे गए या मिसिंग हुए सेना के जवानों के बच्चों को एजूकेशन फंड मिलता था। इसमें ट्यूशन से लेकर हॉस्टल फ़ीस का रिंबर्समेंट( प्रतिपूर्ति)  शामिल था। मगर सरकार ने अब इस फ़ंड में भारी कटौती कर 10 हज़ार तक सीमित कर दिया है।  इस फैसले से देश के 1300 शहीदों के बच्चे सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।  नौसेना प्रमुख ने ख़ुद इसके खिलाफ आवाज उठाई है।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को मार्मिक पत्र लिखा है। कहा है कि ‘ वे हमारी रक्षा के लिए जान देने से नहीं चूके।देश की सरहद की रखवाली करते मर मिटे। अब उनके बच्चों को देखने वाला कौन है? असहाय परिवारों पर यह चोट मत मारिए।   प्लीज बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ मत कीजिए। आदेश पलट दीजिए। शहीदों के बच्चे बहुत कातर भाव से सरकार की तरफ़ देख रहे हैं।  नौसेना प्रमुख का कहना है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि सरकार संवेदनशीलता दिखाकर एक जुलाई का वह आदेश वापस लेगी। ‘

बता दें कि 1971 युद्ध के बाद से तत्कालीन सरकार ने शहीदों के बच्चों के लिए एजूकेशन फ़ंड की व्यवस्था की थी। इस नियम के तहत अगर कोई जवान ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाता, लापता या दिव्यांग हो जाता है, तो उसके बच्चों के स्कूल, हॉस्टल, ट्यूशन, किताब, कपड़ों आदि का खर्च सरकार उठाती थी।

सैनिकों के परिवार कह रहे हैं कि समझ नहीं आता कि शहीदों की सबसे ज़्यादा गैरवगाथा गाने वाली इस सरकार में किसके कहने पर किसने यह प्रस्ताव बनाया और कैसे पास हो गया।

सोशल मीडिया पर इस खबर पर लोग तीखी प्रतिक्रिया जता रहे हैं। कह रहे हैं कि-

काश, वायरल सच में यह खबर झूठी निकले या फिर सरकार ऑर्डर वापस ले

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