मोदी ने कहा था कि मै देश नहीं बिकने दूंगा तो लोग समझ नहीं पाए थे, उनका मतलब था मै देश खुद ही बेच दूंगा

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प्रधानमंत्री मोदी के उन भाषणों को याद करिए जब वे मनमोहन सिंह की सरकार के कामो के बारे में चुनावी मंचों पर अनलिमिटेड झूठ बोला था आज उनके सारे झूठ एक के बाद एक सामने आने लगे हैं उनका एक झूठ मुझे भी बहुत याद आता है जब मोदी ने कहा था कि मै देश नहीं बिकने दूंगा तो लोग समझ नहीं पाए थे, मतलब था मै देश खुद ही बेच दूंगा. जाने वाली नही है मोदी जी ने पिछले दिनों प्रवासी भारतीय सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश में आने वाले निवेश में से आधा पिछले तीन वर्षो में आया है, इतना बड़ा झूठ किसी प्रधानमंत्री ने आज तक नही बोला होगा !

जबकि हकीकत ये है कि उनके कार्यकाल के 3 सालों में 6.31 लाख करोड़ रुपए का इक्विटी एफडीआई आया है। जबकि मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार के आखिरी तीन सालों में 5.22 लाख करोड़ रु. की इक्विटी एफडीआई ही आई थी। यानी मोदी सरकार में विदेशी निवेश सिर्फ 20.8% बढ़ा है ओर मोदी जी झोंक में बोल गए कि देश में आने वाले कुल निवेश में से आधा पिछले तीन वर्षो में आया है,

पर मोदी जी झूठ बोलने मे यही नही रुके और आगे देखिये 

उन्होंने आगे कहा कि पिछले वर्ष देश में रिकॉर्ड 16 अरब डालर का निवेश आया। यह सरकार की ओर से दूरगामी नीतिगत प्रभाव वाले निर्णयों के कारण आए हैं, इसे भी जरा हकीकत के आईने पर परख लीजिए सच यह है कि देश में साल 2016 के दौरान 18 फीसद के उछाल के साथ 46 अरब डॉलर का विदेशी निवेश (FDI) आया था औद्यो‍गिक नीति एवं संवद्धर्न विभाग (DIPP) की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 के दौरान भारत में 39.32 अरब डॉलर का विदेशी निवेश हुआ था ओर जैसा मोदीजी बोल रहे हैं कि 2017 में 16 अरब डॉलर का निवेश आया तो सच्चाई यह है कि यह निवेश इस पिछले साल की तुलना में ही लगभग एक तिहाई रह गया है यह नोटबन्दी ओर जीएसटी के बाद अर्थव्यवस्था की बिगड़ी स्थिति को दिखलाता हैं,

पर राजा नँगा है ये कोई नही बोलता

अब यह जान लेना भी समीचीन होगा कि ये बढ़ता हुआ FDI कहा से आया ? भारत मे मोदी राज में बढ़ते विदेशी निवेश की असलियत यह है कि वह अधिकतर भारतीय उद्योगपतियों नेताओं और भ्रष्ट अधिकारियों का काला धन है जो आज भी सिंगापुर ओर मॉरीशस रुट से ही आ रहा है  आंकड़े बताते है कि भारत में 2016-17 में मॉरीशस के रास्ते सबसे अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया. इस मामले में मॉरीशस ने सिंगापुर को पीछे छोड़ा है.




औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के आंकड़ों के अनुसार 2016-17 में मॉरीशस से देश में 15.72 अरब डॉलर का एफडीआई आया, जबकि सिंगापुर से यह आंकड़ा 8.71 अरब डॉलर का रहा. वित्त वर्ष 2015-16 में सिंगापुर पहले स्थान पर रहा था.

यानी कि अब भी वही मॉरीशस सिंगापुर रुट ! जिसे भाजपाई एक समय पर काले धन की गंगोत्री बताया करते थे. हमारे वित्तमंत्री अरुण जेटली तो यह दावा करते आये हैं कि हमने काले धन को रोकने के लिए मॉरीशस रूट को बंद कर दिया है, तथा सिंगापुर रूट को भी बंद करने के लिए हमने सिंगापुर को चिट्ठी लिख दी हैं उसके बावजूद कैसे इतना अधिक विदेशी निवेश इन देशो के माध्यम से आया है यह कम से कम सोचने की बात तो है !


एक ओर आंकड़े पर नजर डाले तो हालात और साफ हो जाएंगे,

मनमोहन सरकार के अंतिम साल में भारत से बाहर होने वाले एफडीआई प्रवाह में मॉरीशस एवं सिंगापुर का हिस्सा 20 फीसदी हुआ करता था लेकिन मोदी सरकार के पहले दो वर्षों में यह बढ़कर 29-31 फीसदी हो गया। पिछले साल तो इसमें 58 फीसदी की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है.एक बात पर ओर दिमाग लडाइयेगा , जैसा मोदी जी बोल रहे हैं कि हमने तीन सालों में इतना अधिक विदेशी निवेश हासिल किया तो उस हिसाब से रोजगार क्यो नही बढ़े ? वैसे सच्चाई यह है कि बढ़ना तो दूर रोजगार के अवसर लगातार घट रहे है. क्या कहा, सिर दुखने लगा ! अच्छा छोड़िए एक बात बताइये आज न्यूज़ चैनलो पर हिन्दू मुस्लिम को लेकर कौन सी बहस चल रही हैं ?

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