अहमदाबाद पश्चिम में स्थित है मणिनगर विधानसभा क्षेत्र, जहां से चुने गए नरेंद्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे और 2014 का लोकसभा चुनाव (वाराणसी से) जीतकर प्रधानमंत्री भी बने । जिन लोगों का चुना हुआ MLA पहले CM बने और फिर लोकसभा में जाकर देश का PM बन जाए उनकी उम्मीदें निश्चित तौर पर बढ़ जाती है।

वह भी ऐसा  प्रधानमंत्री जो चुनावी कैंपेनिंग से पहले और बाद में, गुजरात में हुए तथाकथित अप्रत्याशित विकास को प्रचारित और प्रसारित करता हो।

2002, 2007 और 2012 में तीन बार लगातार मणिनगर से विधायक चुने जाने के बाद नरेंद्र मोदी ने 2014 में जब इस सीट को छोड़ा तब उनके उम्मीदवार को भी लोगों ने भारी मतों से जिताया, इस उम्मीद में कि हालात अब बेहतर होंगे।

इस क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों को देखने जब बोलता हिंदुस्तान की टीम मणिनगर विधानसभा पहुंची तो यकीन करना मुश्किल होगया कि ‘विकास मॉडल’ के सबसे बड़े चेहरा बने नरेंद्र मोदी के विधानसभा में ये हालात हैं।

कुछ इलाकों में तो विकास हुआ है, बड़ी-बड़ी हाउसिंग सोसायटी बनकर तैयार हैं, जिसमें लोग रह रहे हैं और संभवतः वह ‘फील गुड’ कंडीशन में है, इसलिए व्यवस्था से नाराजगी कम है। लेकिन उन इलाकों पर नजर डालने पर बदहाली दिखी जिधर छोटे कामगार और मजदूर रहते हैं। ऐसे ही छोटे कामगारों और मजदूरों का की बस्ती है ‘मिल्लतनगर’।

झाडू बनाना ,मच्छरदानी बनाना और बढ़ई-कारपेंटर का काम करने वाले ये लोग दो जून की रोटी कमाने के लिए दिन रात लगे रहते हैं फिर भी इनकी बस्तियों में गंदगी ,कचरा और अव्यवस्था जगह-जगह फैली नजर आती है। यहां तक कि पीने का पानी भी सरकारी सप्लाई का नहीं आता बल्कि बोरवेल के जरिए घरों में पानी पहुंचता है जिसके लिए उन्हें मासिक खर्च देना पड़ता है।

नोटबंदी के बाद बने हालात को याद करके लोग भावुक हो जाते हैं, कष्ट और बदइंतजामी की कहानी बयां करने लगते हैं ।

कई वर्षों से झाड़ू बना रहे एक मेहनतकश कारोबारी बताते हैं कि नोटबंदी के दिक्कतों से अभी उबर भी नहीं पाए थे कि जीएसटी लगा दिया जिसकी जद में उनकी बनाई सीक वाली झाड़ू भी आती है। जिसकी वजह से उसकी बिक्री पर काफी असर हुआ है।

क्षेत्र में इधर उधर भटकते युवाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है। ऐसे ही एक युवा हमसे बात करते हुए कहते हैं

यहां लोगों के पास करने के लिए काम नहीं है।ये सरकार पता नहीं किसके लिए काम कर रही है। इसने अमीरों को और अमीर और गरीबों को और गरीब बना दिया है। अभी तक मोदी जी के जितने फैसले हैं वो सब अमीरों के लिए रहे हैं। गरीबों के लिए उन्होंने कुछ नहीं किया है । पहले नोटबंदी की, उसके बाद जीएसटी लगा दिया। दोनों ही फैसले से जो परेशान हुआ वह गरीब और आम आदमी । यह सब देख कर अब राजनेताओं से विश्वास उठने लगा है।’

पूरे मिल्लत नगर इलाके में सीवर और नाली निकासी की व्यवस्था का अभाव है। चाय की दुकान पर बैठे कुछ अधेड़ और बुजुर्गों से बात करने पर पता चला कि चुनावी सीजन में हर बार उन्हें कुछ पर्चे बांटे जाते हैं जिसमें लिखा होता है कि आपकी सारी समस्याएं खत्म होने वाली है और अब आप लोगों को रहने के लिए साफ-सुथरे मकान की व्यवस्था की जा रही है ।लेकिन हर बार ही ऐसा करते हैं और चुनाव के ठीक बाद इन पर्चों में किए गए वादों पर बात करने के लिए कोई नहीं मिलता है ।

मजदूरों और छोटे कामगारों की बस्ती मिल्लत नगर से निकलकर हम मणिनगर के शहरी इलाके की ओर कूच किए।वहां पर लोगों से बात करने की कोशिश की तो अधिकतर की प्रतिक्रिया यही थी की तमाम दिक्कतें हुई हैं लेकिन यह सब होती रहती हैं। इसलिए इनपर ज्यादा बात करने की जरूरत नहीं है।

लेकिन शहर के बीचोबीच फूल मालाओं का कारोबार करने वाले लोगों से बात किया तो नोटबंदी जीएसटी और बेरोजगारी का दर्द फुटकर सामने आ गया। फूल माला बनाने में व्यस्त नवयुवक का कहना था ‘एक तो पहले से ही हम बेरोजगार थे, ऐसे ही छोटे मोटे काम करके पेट पालना होता था , उसके बाद नोटबंदी लागू कर दी जिससे दिक्कतें और बढ़ गई। रही सही कसर जीएसटी ने पूरी कर दी। बढ़े टैक्स से बहुत सारे सामान महंगे हो गए और कम कमाने वाले लोगों की मुसीबतें बढ़ती चली गई।’

थोड़ा और आगे बढ़ने पर बड़ी-बड़ी चमकदार इमारतें दिखने लगी जिनके शीशे से रिफ्लेक्ट होकर आती चकाचौंध रोशनी संदेश दे रही थी कि इसी चमक को मणिनगर,अहमदाबाद और गुजरात की वास्तविक तस्वीर बताओ और इस चकाचौंध से आगे ‘मिल्लतनगर’ जैसी मजदूरों और गरीबों की बस्तियों की ओर लोगों की नजरें ना जाने पाएं, नहीं तो गुजरात की वास्तविक तस्वीर सामने आ जाएगी।

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