बिहार: बाढ़ के दौरान दलितों को मरने के लिए छोड़ा, ऊंची जाति के लोगों को बचाया गया- रिपोर्ट

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पटना। नेशनल कैंपेन ऑन ह्यूमन राइट्स ने एक रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इसी साल उत्तरी बिहार के अधिकांश इलाकों में आयी बाढ़ के दौरान दलित, महादलित, अल्पसंख्यक और वंचित समाज के लोगों की उपेक्षा की गई। उनके लिए किसी भी तरह के राहत शिविर का संचालन नहीं हुआ। सरकारी राहत कार्यक्रम पूरी तरह से बड़ी जातियों के द्वारा संचालित किया गया।

रिपोर्ट में कहा गया कि बिहार के सरकारी बचाओ दल के लोगों ने मुख्य सड़क, मार्ग इत्यादि के किनारे फंसे लोगों को तो निकाला लेकिन अंदर के गांवों में रहने वाले दलितों, अल्पसंख्यकों, महादलितों को मरने के लिए छोड़ दिया।

गांधी संग्रहालय में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक में रिपोर्ट में कहा गया कि जहां भी शिविर चले वहां बिहार सरकार एवं केंद्र सरकार के तय मानकों का पालन नहीं हुआ। कई राहत शिविरों में बड़ी जाति के लोगों ने दलित, महादलित को खाना, रहने तथा सोने की सुविधा नहीं दी।

आपको बता दें कि जातिगत तथा धार्मिक भेदभाव की परख के लिए नेशनल दलित वाच, नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स तथा जन जागरण शक्ति संगठन की ओर से एक जांच दल ने अररिया और किशनगंज जिले के बाढ़ प्रभावित गांव का दौरा किया। इस टीम ने सरकारी राहत एवं बचाओ कार्यक्रम को दलित, वंचित, मुस्लिम समाज के नज़रिए से प्रमुख गड़बड़ियां उजागर की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अररिया, किशनगंज, चंपारण, छपरा जिलों के बाढ़ पीड़ितों नें भाग लिया।

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