पुणे जातीय हिंसा: चुनाव के चलते 5 मिनट में ट्वीट करने वाले PM मोदी ‘दलित अत्याचार’ पर 72 घंटे से चुप्प क्यों?

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पुणे में भीमा-कोरेगांव लड़ाई की सालगिरह पर दलितों के साथ हुई हिंसा को आज 3 दिन पूरे हो गए हैं। इस हिंसा का असर पूरे महाराष्ट्र में नज़र आ रहा है। जहां आज पूरा महाराष्ट्र बंद रहा, जगह-जगह प्रदर्शनकारियों ने तोड़ फोड़ मचाई, ट्रेने रोक दी गई, लोगों को धमकी देकर दुकाने बंद करवा दी गईं।

देश के लगभग सभी छोटे-बड़े मंत्रियों और नेताओं ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लेकिन 3 दिन से चल रहे इस हिंसा पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है।

जिसे लेकर विपक्ष संसद में लगातार सवाल उठा रही है। विपक्ष का कहा है कि कि इस मामले पर प्रधानमंत्री अभी तक चुप क्यों बैठे हैं? विपक्ष समेत आम जनता भी इस सवाल का जवाब जानना चाहती है कि आखिर क्यों, हर छोटे बड़े मामलों पर ट्वीट कर प्रतिक्रिया देने वाले प्रधानमंत्री इतने बड़े हिंसा पर खामोश हैं।

हाँ, यह एक अलग बात है कि प्रधानमंत्री मोदी खुद को दलित हितैषी बताते है। चाहे वो आंबेडकर की जयंती हो या आज सावित्रीबाई फुले की जयंती हो। पीएम माला चढ़ाने और ट्विटर पर नमन करने में सबसे आगे रहते हैं। लेकिन दलितों पर किए जा रहे हिंसा पर वो चुप हैं, न कोई ट्वीट आया है, न ही बयान। गौरतलब है कि सहारनपुर में भी दलितों पर हुए अत्याचार पर भी पीएम मोदी चुप्प थे।

आपको बता दे कि कोरेगाओं हिसा मे जिन लोगो के नाम सामने आए है उनकी कड़ी भाजपा से जुड़ी नज़र आ रही है। हिंसा भड़काओ आरोप मे दो हिंदुवादी नेताओ के खीलफ मामला दर्ज किया गया है, यह दोनों ही भाजपा के करीबी बताए जा रहे है।

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