पालिका और पंचायत चुनावों में हार का ज़श्न मना रहे है योगी,समझे आकड़ा

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लखनऊ-निकाय चुनाव को नगर निगम के नतीजे मानकर ही मीडिया ने इसे भाजपा द्वारा क्लीन स्वीप की संज्ञा दे दी लेकिन हैरानी की बात ये है जितने वोटर नगर निगम में है उससे ज्यादा वोटर नगर पालिका और नगर पंचायत में है.

भाजपा ना तो नगर पलिका अध्यक्ष के चुनाव में और ना ही नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में वो कमाल कर पाई जैसा उसने नगर निगम में किया है उल्टा भाजपा को सपा और बसपा ने कांटे की टक्कर दे दी लेकिन इन सब से मुहं मोड़कर इसे भाजपा की क्लीन स्वीप बताया जा रहा है.

सीएम योगी टेलीविजन पर आकर इस नतीजे पर लोकसभा चुनाव में 80 सीट का दावा कर रहे है अगर नतीजों का आकलन किया जाए तो इस लिहाज़ से भाजपा पचास लोक सभा सीट भी नही जीत पायेगी.




भाजपा को नगर निगम में चालीस प्रतिशत मत ही मिला है जबकि विधानसभा चुनाव में ये आकड़ा पुरे प्रदेश में 41 प्रतिशत से थोडा उपर था अगर नगर पालिका अध्यक्ष और नगर पंचायत अध्यक्ष की बात की जाए तो यहाँ भाजपा बमुश्किल तीस प्रतिशत मत भी हासिल नही कर पाई.

198 नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा 70 से आगे नही जा सकी,वही सपा 45 और बसपा 29 पर कामयाबी पाने में सफल रही अगर कस्बो के निकाय चुनाव यानि नगर पंचायत की बात की जाए तो यहाँ भाजपा का प्रदर्शन और नीचे गया है,भाजपा 100 पर ही कामयाबी पा सकी.नगर पंचायत चुनावों में समाजवादी पार्टी 83 सीटे जीतने में कामयाब रही.बसपा ने भी 45 ज़गह जीत दर्ज की.

अगर नगर निगम,नगर पालिका और नगर पंचायत का ठीक से विशेलेषण किया जाए फिर भाजपा शहरो में काफी हद तक अपराजय बनी हुई है लेकिन छोटे शहरो और कस्बो में सपा और बसपा उसके आधार पर चोट करने में काफी हद तक सफल रही.

जिस तरह से बड़े शहर से कस्बो तक आते आते भाजपा का ग्राफ गिरता जा रहा है उससे ग्रामीण आंचल में भाजपा के वोट बैंक में गिरावट को समझा जा सकता है.

उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनावों में भाजपा की भारी जीत की असलियत देखिये, कि ये लोग आख़िर कितने बड़े झूठे और बेईमान हैं।

दोपहर से भाजपा नेताओं औऱ मीडिया ने योगी मोदी का जो बावला राग गा रखा है।वो ना सिर्फ इनके नैतिक औऱ राजनीतिक चरित्र की पोल खोलता है ,बल्कि सच्चाई से सामना ना करने की हिम्मत रखने वाले घटिया औऱ निर्लज्ज लोगो के गिरोह का भी प्रत्यक्ष प्रमाण देता है।

चुनाव परिणामों पर ज़रा गौर करें।
महापौर पद- 16 भाजपा विजयी – 14
बोलो योगी योगी- मोदी मोदी

बहुत बढ़िया बात है।यानि जनता ने जीएसटी, नोटबन्दी महंगाई, अपराध और बेरोजगारी को कोई बड़ा मुद्दा ना मानते हुए भाजपा में पूर्ण विश्वास कायम रखा।

लेकिन इसे हज़म करने में एक समस्या आड़े आ रही है, और वो ये कि इन 16 महापौर पदों पर ईवीएम से चुनाव हुए।

तो क्या हुआ?? अगर ईवीएम से चुनाव हुए तो?? जनता ने मोदी योगी पर विश्वास जताया है तो आपके पेट मे काहे मरोड़ उठ रही है??




तो सुनो बेईमानों,अगर हिम्मत है तो महापौर के साथ साथ उन 198 नगर पालिका अध्यक्ष और 438 नगर पंचायत अध्यक्ष की सीटों पर भी दो शब्द बोल दो,जहाँ पर मतदान बैलेट पेपर से हुए, और वहां के परिणाम तुम्हारे थोबड़े पर कालिख़ पोतने के लिए काफी हैं।
ज़रा देखिये इन सीटों पर क्या हुआ।

नगर पालिका अध्यक्ष पद- 198
भाजपा-60
सपा-39
बसपा-26
कोंग्रेस-7
निर्दलीय-40
यानि भाजपा- 60 , विपक्ष- 112

और देखिये

नगर पंचायत अध्यक्ष पद- 438
भाजपा-96
सपा-81
बसपा-43
कोंग्रेस-17
निर्दलीय-175
यानि भाजपा-96, विपक्ष- 316

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