पत्नी की हत्या के आरोपी हैं PM मोदी के नए प्रेरणास्त्रोत जग्गी वासुदेव: मेधा पाटकर

143

उनका कहना है कि जिस पर कई तरह के संगीन आरोप हैं, वह उद्योगपतियों के इशारे पर नदियों की वकालत कर रहा है, वह आने वाले समय का दूसरा राम रहीम साबित होगा।

पत्नी की हत्या के आरोपी हैं PM मोदी के नए प्रेरणास्त्रोत जग्गी वासुदेव: मेधा पाटकर

नदियों को बचाने और उनके संरक्षण के लिए ‘रैली फॉर रिवर’ निकालने वाले सद्गुरु जग्गी वासुदेव पर नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने बड़ा हमला बोला है। उनका कहना है कि जिस पर कई तरह के संगीन आरोप हैं, वह उद्योगपतियों के इशारे पर नदियों की वकालत कर रहा है, वह आने वाले समय का दूसरा राम रहीम साबित होगा।

भोपाल जनउत्सव में हिस्सा लेने आईं मेधा ने कहा,

“जग्गी वासुदेव कौन है। इसे कम लोग जानते हैं, इस पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप है, कोयंबटूर में ईशा फाउंडेशन का जो आश्रम है, वह संरक्षित वन क्षेत्र (रिजर्व फारेस्ट) में है, इस आश्रम के कई भवनों को तोड़ने के आदेश हैं, यह आश्रम जिस जगह है, वह एलीदेंट कॉरीडोर से गुजर रहा है, यही कारण है कि हाथियों की मौत हो रही है।”

मोदी के करीबी हो गए हैं जग्गी वासुदेव

पीएम मोदी आजकल दग्गी वासुदेव को अपना नया आध्यात्मिक गुरू बना चुके हैं। 25 फरवरी को जब जग्गी वासुदेब ने पीएम मोदी को बुलावा भेजा था तब मोदी अपने सारे कार्यक्रम को छोड़ सदगुरु की ओर से भगवान शिव की 112 फिट ऊंची बनवाई गई मूर्ति  का अनावरण किया था। मोदी जब अपने ड्रीम प्रोजेक्ट जीएसटी पर देशभर के इनकम टैक्स और रेवेन्यू कमिश्नरों की बैठक लेते हैं तो उनसे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली नहीं बल्कि जग्गी बाबा उद्बोधन करते हैं। इससे ज्यादा मोदी से उनकी नजदीकी और क्या होगी कि कालेधन के खिलाफ मुहिम में जुटे अफसरों को अध्यात्म का ज्ञान पिलाने के लिए खुद प्रधानमंत्री विशेष रूप से जग्गी का अध्यात्म समागम दिल्ली में कराते हैं।। मोदी से जग्गी की नजदीकियां इतनी हैं कि करीबी कहते हैं कि भले ही मोदी अमित शाह और जेटली का फोन कुछ समय के लिए होल्ड पर रख दें, राजनाथ का फोन भी न उठाएं। मगर सदगुरु से  हमेशा हॉटलाइन पर जुड़े रहते हैं।

पत्नी की संदिग्ध मौत पर क्या कहते हैं सदगुरु

23 जनवरी 1997 को सदगुरु की पत्नी विज्जी की मौत का मामला कभी सुर्खियों में रहा था। इंडिया संवाद ने इस मामले पर और जानकारी के लिए तफ्तीश की तो तहलका पत्रिका के लिटरेरी एडिटर गौरव का एक इंटरव्यू  हाथ लगा। इसमें सदगुरु ने पत्नी की मौत पर खुलकर प्रतिक्रिया देने के साथ मामले में नाराजगी भी जाहिर की है। दरअसल एडिटर ने पूछा था कि आपकी पत्नी की मौत के पीछे आपका हाथ माना जा रहा था। इस पर सदगुरु ने कहा कि पत्नी की मौत के आठ महीने बाद उन पर केस दर्ज हुआ। वो भी एक पॉवरफुल बैंकर के इशारे पर यह केस मीडिया ने उछाला। मगर डीजीपी ने उन्हें अरेस्ट करने से मना कर दिया। क्योंक मुझे बैंकर ने फर्जी फंसाने की कोशश की। क्योंक बैंकर मुझसे रंजिश रखता था। सदगुरु इंटरव्यू के दौरान कहते हैं कि क्या मेरी गिरफ्तारी हुई, क्या मुझसे पूछताछ हुई, फिर मुझसे इस पर सवाल क्यों। पत्नी की मौत को सदगुरु मौत नहीं मानते। बल्कि शरीर त्यागना कहते हैं। कहते हैं कि ध्यानलिंगा नामक साधना के वक्त पत्नी ने शरीर छोड़ा।  यह एक आध्यात्मिक प्रक्रिया रही। अध्यात्मिक प्रेरणा से पत्नी ने स्वतः शरीर का त्याग किया। तमाम लोग इसके गवाह रहे। दो हजार से ज्यादा लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल रहे। यह उनके लिए गर्व की बात है। मगर आठ महीने बाद मर्डर की अफवाह उड़ाई गई।

Our Sponsors
Loading...