नोटबन्दी- “हर घर से शम्भू निकलेगा” कहने वाला अंधभक्त कर्ज में डूबा, सरकार पर दोष मढ़ की आत्महत्या -लाइव वीडियो वायरल

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एक के बाद एक सरकार द्वारा उठाये गए जोखिम भरे क़दमो ने व्यापारियों किसानों सहित आम आदमी के जीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है। नोटबन्दी ओर GST के दंश से सिर्फ भाजपा के विपक्षी ही नही भाजपाई भी परेशान है ओर ये बात छिपाए नहीं छिप रही, हफ्ता नहीं बीतता कि किसी न किसी की आत्महत्या की खबर सुर्खियां बन जाती है, प्रतिमाह सैंकड़ो लोग आत्महत्या कर रहे हैं, उसी कड़ी में अब एक नाम इर जुड़ा है “प्रकाश पांडेय” का।

प्रकाश पांडेय कोई मामूली भाजपा कार्यकर्ता नहीं थे बल्कि वरिष्ठ कार्यकर्ता थे, उन्हें 10 साल तक झांसा दिया जाता रहा कि भाजपा की सरकार आएगी तो ये हो जाएगा वो हो जाएगा, स्थानीय नेता उनको हर इलेक्शन में लूट लेते, इसी के चलते प्रकाश पांडेय पूरी तरह कर्ज में डूब गए, लेकिन उन्हें दुख तब हुआ जब सरकार बनने के बाद भी उनके लोन की स्थिति बद से बदतर हो गयी। GST ओर नॉट बन्दी ने उन्हें बुरी तरह तोड़ दिया था लेकिन “अंधभक्ति में लीन व्यक्ति को हर पापी भगवान दिखाई देता है” वाली कहावत को चरितार्थ करते रहे। 5 दिन पहले तक उनके फेसबुक स्टेटस से दंगे फसाद की बू आती रही। और वो पानी पी पीकर आतंकियों का समर्थन करते रहे। यहां तक कि उन्होंने शम्भूनाथ जैसे आतंकी की सराहना करते हुए लिखा कि “हर घर से शम्भू निकलेगा” इसके अलावा उन्होंने दलितों के लीडर जिग्नेश मेवानी को “कुत्ता” शब्द से संबोधित किया। उनकी फेसबुक प्रोफाइल हिंदुत्व से भरी हुई है ही बल्कि खुले तौर पे उन्होंने खुदको दलित विरोधी लिखा है। ओर खुदको ब्रह्मामवादी दर्शाया है।

उनके इस साम्प्रदायिक रवैये पर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रिया आ रही हैं एक वरिष्ठ सोशल मीडिया यूज़र Aaghaaz Siddiqui ने लिखा है –”दरअसल सोशल मीडिया पर नफरत का कारोबार करने वाले अंधभक्त भीतर से इतने ही टूटे और कमजोर इच्छाशक्ति के लोग होते हैं..
मुझे प्रकाश पांडे के परिवार और उनके आश्रितों से संवेदना है, परंतु अगर ये जिंदा रहते भी तो सिर्फ समाज में जहर ही घोलते।”

वहीं एक ओर अनाइडेंटिफाइड सोशल मीडिया यूज़र चौधरी ने मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी ओर आगाज़ सिददीकी के रिप्लाय में लिखा -“Aaghaaz Siddiqui भाई की बात से पूर्णतः सहमत ऐसे हर अंधभक्त को इसी तरह का वीडियो बना कर डूब मरना चाहिए बहुत प्रदूषण कर रखा है इन्होंने”
इससे ये पता चलता है कि देश मे नफरती चिन्टूओं से कोई भी हमदर्दी नहीं रख रहा न तो पार्टी के मानसिक दूषित लोग न ही इनकी मानसिकता से प्रभावित लोग।
इसके अलावा एक पत्रकार Mohd Zahid- ने अपने फेसबुक अकाउंट से लिखा है-

FBP/18-004

प्रकाश पांडे मर गया :-

उत्तराखंड में मंत्री जी की सभा में सल्फास खा कर आया प्रकाश पांडे मंत्री जी को “जीएसटी” के कारण बर्बाद अपने कारोबार और तीन ट्रकों के लोन में डिफाल्टर होने की व्यथा सुनाते सुनाते रो पड़ा , तीन दिन तक अस्पताल में रहने के बाद वह चल बसा।




तीन ट्रक का ट्रान्सपोर्टर अपने बच्चों की फीस तक जमा कर पाने में असहाय था तो जीएसटी के कारण व्यापार पर पड़ी मार को समझ सकते हैं।

एक वर्ष से सब ऐसे ही घिसट रहे हैं।

जालियाँवाला बाग नरसंहार का आर्डर देने वाले जनरल डायर को ब्रिटेन में घुस कर मार डालने वाले शहीद उधम सिंह के पौत्र गुरदेव सिंह ने भी कर्ज के कारण फरीदकोट के एक कूंए में फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली।

प्रकाश पांडे भाजपाई था , ब्राम्हण था , और उत्तराखंड की ब्राम्हणवादी सरकार भी उसके जीवन की रक्षा नहीं कर सकी , शहीद उधम सिंह के पौत्र गुरदेव सिंह भी देश के नायक के पौत्र थे , कर्ज में डूबा यह किसान पौत्र गुरदेव सिंह भी आत्महत्या को मजबूर हुआ।

लाखों लाख करोड़ डकार गये और लेकर भाग गये मोदी मित्र उद्योगपतियों और स्वयं मोदी को यह “ईहलीला” मुबारक।

एक एक करके इस भ्रष्ट सिस्टम में सब मरेंगे क्या भाजपाई और क्या हम , क्या हिन्दू क्या मुसलमान , रायसीना हिल्स की चौपाल में बैठै 525 धुर्तों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता , उनको सत्ता चाहिए और उस सत्ता के लिए वह ना जाने कितने ऐसे प्रकाश पांडे , गुरदेव सिंह , अखलाक और पहलू खान की बलि ले लेंगे , देश को हिन्दू मुस्लिम में उलझा कर सत्ता की मलाई खाई जाती रहेगी।

इस देश में नेता और उद्योगपति मस्त हैं और आपसी साँठ गाँठ करके देश और जनता को लूट रहे हैं। उधोगपति नेताओं का चुनाव फाईनेन्स करते हैं और नेता जनता को मुर्ख बना कर कभी हिन्दू-मुसलमान तो कभी कब्रिस्तान-शमशान-पाकिस्तान कह कर जनता का वोट ठगते हैं।

जनता जब तक अपने मूलभूत मुद्दे पर सरकार से सवाल नहीं पूछेगी , इस मुद्दे पर दंड देकर वोट नहीं देगी तब तक ऐसे मुद्दे सरकारों के लिए गौण हैं।

सोचिएगा कि जब बिना पढ़े ही नौकरी मिल जाए तो कौन पढ़ेगा ? जब शमशान-कब्रिस्तान से ही सत्ता मिल जाए तो जनता के मूलभूत मुद्दे पर ध्यान कौन दे ?

फिर प्रकाश पांडे और गुरदेव सिंह की लाश ढोते रहिए , और रोते रहिए।

यह सच है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मोदी सरकार आने के बाद जीवन दुष्कर हो गया है , इसकी एक वजह कृषि आधारित जीवन जीने वाले किसानों के कृषि उत्पाद की कीमतों का घटना जो कि मोदी जी के लागत से डेढ़ गुना दाम के झूठे वादे के बाद 2014 से भी मूल्य कम हुआ तो दूसरा कारण “मनरेगा” पर इस सरकार की कुदृष्टी।

हो सकता है कि मनरेगा में भ्रष्टाचार हुआ हो , प्रधान से सेटिंग करके हाज़िरी ज़्यादा लगाई गयी हो तो भी कम से कम इस भ्रष्टाचार से देश के गरीब किसानों का चूल्हा तो जलता था जीवन तो चलता था।

यह कहाँ का इंसाफ है कि इस देश में भ्रष्टाचार सिर्फ़ पैसे वाले , उधोगपति और बड़े अधिकारी ही करें , यदि किसान मजदूर ₹500-1000 का अधिक धन पाता भी था तो भी वह देश के कुछ उधोगपतियों के द्वारा डकारे गये लाखों करोड़ रूपये से बेहतर ही था।

दरअसल नरपिचास मोदी सरकार को खाने के लिए इंसानी लाश चाहिए , और जब उसे भूख लगेगी तो वह जाति धर्म नहीं देखेगी , नजीब , प्रकाश पांडे , गुरदेव सिंह और रोहित वेमुला नहीं देखेगी।

उसे तो बस लाश चाहिए चाहे किसी की भी हो।

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