दुनिया के सबसे बड़े पर्यटन स्थल में से एक ताजमहल पर पड़ी योगी सरकार की मार

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उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित यमुना नदी के किनारे सफेद पत्थरों से निर्मित अलौकिक सुंदरता की तस्वीर ‘ताजमहल’ न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बना चुका है। प्यार की इस निशानी को देखने के लिए दूर देशों से हजारों सैलानी यहां आते हैं। यही वजह है कि ताजमहल, प्रेम और भारत की अमिट पहचान बन चुका है।

लेकिन दुनिया के सात अजूबों में शुमार भारत की धरोहर ताजमहल को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने पर्यटन स्थल की सूची से बाहर कर दिया है। बता दें कि इससे पहले योगी सरकार ‘ताजमहल’ को भारत की ‘सांस्कृतिक विरासत’ मानने से इनकार कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, योगी सरकार द्वारा यूपी पर्यटन की बनाई गई नई बुकलेट में ताजमहल को जगह नहीं दी गई है। हालांकि इस मामले में योगी सरकार की तरफ से अभी तक इस मुद्दे पर आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। लेकिन सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर हंगामा शुरू हो गया है।

दरअसल, यूपी में हर वर्ष पर्यटन मंत्रालय की आधिकारिक बुकलेट जारी होती है। इस बुकलेट में प्रदेश के हर बड़े पर्यटन स्थल के बारे में जिक्र होता है और उस पर्यटन स्थल के चित्र भी इस बुकलेट में छापे जाते हैं। लेकिन इस बार का बुकलेट विवादों में घिर गया है क्योंकि इसमें ताजमहल को जगह नहीं दी गई है।

गोरखनाथ मंदिर और अयोध्या को मिली जगह

इस बार के नई बुकलेट में गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर को विशेष तौर पर जगह दी गई है। इसके अलावा नाथ संप्रदाय से ही जुड़े यूपी के बलरामपुर में स्थित देवी पाटन शक्ति पीठ को भी स्थान दिया गया है। इस बार की बुकलेट का पहला पेज वाराणसी की गंगा आरती को समर्पित किया गया है।

इस बार के बुकलेट की खास बात यह है कि इस बार इसमें अयोध्या को भी शामिल किया गया है। बुकलेट के बारहवें और तेरहवें पेज में अयोध्या के बारे में विस्तार से जिक्र किया गया है। रामलीला के चित्रों को भी बुकलेट में खास तौर से जगह दी गई है। ईको टूरिज्म से लेकर मंदिर टूरिज्म तक को इस बुकलेट में जगह मिली है लेकिन ताजमहल को नहीं।

गंगा आरती के भव्य दृश्य के साथ दूसरे पेज में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी की तस्वीर है। इस तस्वीर के साथ बुकलेट का उद्देश्य लिखा है। उसके आगे पर्यटन विकास योजनाओं के बारे में दिया गया है। पहले पेज के साथ ही छठवां और सातवां पेज भी गंगा आरती को समर्पित किया गया है।

‘सांस्कृतिक विरासत’ से पहले ही कर चुके हैं बाहर

बता दें कि इससे पहले योगी सरकार ‘ताजमहल’ को भारत की ‘सांस्कृतिक विरासत’ मानने से इनकार कर दिया था।पिछले दिनों 11 जुलाई को योगी सरकार के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 3,84,659.71 करोड़ रुपये के बजट पेश किया, हालांकि इस पूरे बजट में ‘ताजमहल’ का कोई जिक्र नहीं था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य के वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में ‘हमारी सांस्कृतिक विरासत’ सेक्शन से ताजमहल गायब कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 63 पन्नों के इस बजट में ‘ताजमहल’ का एक बार भी जिक्र नहीं किया गया।

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