जाकिर नाईक की संपत्ति कुर्क करने चली ईडी को कोर्ट की फटकार, कहा- आसाराम के खिलाफ क्यों नहीं करते कार्रवाई

258

मुस्लिम धर्मगुरु जाकिर नाईक के मामले में ईडी को कोर्ट की फटकार का सामना करना पड़ा है। ज्‍यूडीशियल ट्रिब्‍यूनल ने इस मामले में जांच को लेकर ईडी को फटकार लगाई है। जस्टिस मनमोहन सिंह ने नाईक की अटैच की गई संपत्ति को ईडी के कब्‍जे में देने से मना कर दिया।

जज ने ईडी के वकील को कहा कि मैं ऐसे 10 बाबाओं के नाम बता सकता हूं जिनके पास 10 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा की संपत्ति है और उन पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। क्‍या आपने उनमें से एक के खिलाफ भी कार्रवाई की? आपने आसाराम बापू के खिलाफ क्‍या किया?



दरअसल ईडी नाईक की संपत्ति अपने कब्ज़े में लेने की इजाजत चाहती थी। मगर ज्‍यूडीशियल ट्रिब्‍यूनल ने इस मामलें में ईडी पर सवाल उठाये, जस्टिस सिंह ने कहा कि जब चार्जशीट में ही तय अपराध नहीं बताए गए हैं तो फिर संपत्ति को जब्‍त करने का आधार क्‍या है।

वकील ने इसका जवाब देते हुए कहा कि नाईक ने युवाओं को अपने भाषणों के जरिए उकसाया है। इस पर जस्टिस सिंह ने बताया कि ईडी ने कोई भी प्रथम दृष्‍टया सबूत या किसी भी भ्रमित युवक का बयान पेश नहीं किया है कि किस तरह से नाईक के भाषणों से युवक अवैध कामों में गए।

इस पर फिर से सवाल पूछते हुए जस्टिस सिंह ने कहा, क्‍या आपने किसी का बयान दर्ज किया कि वे कैसे इन भाषणें से प्रभावित हुए? आपकी चार्जशीट में तो यह भी दर्ज नहीं है कि 2015 ढाका आतंकी हमले में इन भाषणों की क्‍या भूमिका थी।

ईडी के वकील से जज ने कहा, ‘आपने वो भाषण पढ़ें जो चार्जशीट में शामिल हैं? मैंने ऐसे बहुत से भाषण सुने हैं और मैं आपको कह सकता हूँ कि अभी तक मुझे कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला है। इसके बाद ट्रिब्‍यूनल ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया और ईडी को चेन्‍नई में स्‍कूल व मुंबई में एक वाणिज्यिक संपत्ति का कब्‍जा लेने से रोक दिया।

बाद में जज ने कहा कि ऐसा लगता है कि ईडी ने अपनी सुविधा के हिसाब से 99 प्रतिशत भाषणों को नजरअंदाज कर दिया और केवल एक प्रतिशत पर विश्‍वास जताया।

बता दें कि इससे पहले भी आतंकवाद फैलाने के आरोप के बाद देश से भागे इस्‍लामी उपदेशक जाकिर नाईक के मामले में राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को बड़ा झटका लगा है। इंटरपोल ने जाकिर नाईक के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की एनआईए की मांग नहीं मानी।

Courtesy : Bolta Hindustan

        Loading…

Our Sponsors
Loading...