जब एक मौलवी के हांथो पिट गए थे गृहमंत्री राजनाथ सिंह!

356


हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर राजनीती करने वाली भारतीय जनता पार्टी कभी रोने-गाने से नहीं चूकती है. बीजेपी को ऐसा लगता है कि रोने गाने से कुछ मिले या ना मिले पार्टी को जनता की सहानुभूति जरूर मिल जाती है. वो भी बड़ी ही आसानी से.

अब तक रोने धोने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में थी. लेकिन अब इसकी जिम्मेदारी गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ले ली है. दरअसल मामला कुछ ऐसा है कि शनिवार यानि 9 दिसंबर को राजनाथ सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुंचे थें. इस दौरान वो अपने छात्र जीवन को याद कर भावुक हो गए.






राजनाथ सिंह में बताया कि बचपन में उनके गुरु जो कि एक मौलवी थें. वो उनकी पिटाई छड़ी से करते थें. लेकिन जब वो मंत्री बन गए तो वही मौलवी साहब उनके लिए फूल लेकर खड़े थें. दीक्षांत समारोह के दौरान राजनाथ सिंह ने वहां उपस्थीत छात्रों को स्कूल के दिनों का एक किस्सा भी सुनाया.

राजनाथ ने कहा कि जब वह प्राइमरी में थें. उनके स्कूल में एक मौलवी साहब पीटी (शारीरिक शिक्षा) के शिक्षक थे. कोई भी छात्र पीटी के दौरान अगर अनुशासनहीनता करता तो मौलवी साहब कभी थप्पड़ लगाते और कभी एक पतली सी छड़ी से टांगों पर पीटते थे. लोग मौलवी साहब की छड़ी खाकर सही पीटी करने लगते थे.



राजनाथ ने आगे कहा कि, “लंबे समय के बाद जब मैं उत्तर प्रदेश का शिक्षा मंत्री बना और मैं अपने काफिले के साथ अपने घर जा रहा था तो वाराणसी के पास चंदौली के करीब सड़क किनारे मैंने 90 साल के बुजुर्ग को फूल लिये हुए खड़े देखा. मैं तुरंत पहचान गया कि यह तो मेरे वही मौलवी साहब हैं. मैंने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई और मौलवी साहब जो मेरे लिये फूलों की माला लेकर खड़े थे, उसे मैंने उनके गले में डाला और उनके पैर छू कर आशीर्वाद लिया. मौलवी साहब बेतहाशा रोने लगे और मैं भी भावुक हो गया.”

इसमें कोई दो मत नहीं है कि राजनाथ ने यह किस्सा बच्चों को सही राह दिखाने के लिए सुनाया. लेकिन एक सवाल यह भी है कि क्या राजनाथ को उनके स्कूली दिनों के केवल वह मौलवी शिक्षक ही याद हैं? या इसमें भी कोई जाती की राजनीति की जा रही है.

        Loading…

Our Sponsors
Loading...