चुनावों के लिए देश की संपत्ति बेच रही मोदी सरकार, HPCL में 36 हज़ार करोड़ में बेचीं अपनी हिस्सेदारी

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मोदी सरकार अपने राजनीतिक लक्ष्यों को साधने के लिए देश की संपत्ति को बेच रही है। केंद्र सरकार सरकारी कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) में अपनी 51% हिस्सेदारी यानि शेयर को भारतीय सरकार की ही कंपनी आयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) को बेच रही है। इस हिस्सेदारी को ओएनजीसी 36 हज़ार 915 करोड़ में खरीद रही है|

जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद इस साल सरकार के अप्रत्यक्ष टैक्स संग्रह पर प्रभाव पड़ा है। अभी तक सभी राज्यों का राजस्व पहले के मुकाबले कम रहा है और केंद्र सरकार का राजस्व भी पहले से कम रहने की उम्मीद है।

2019 लोकसभा चुनाव को देखते हुए मोदी सरकार इस साल 50 हज़ार करोड़ रुपये अधिक खर्च करना चाहती है। लेकिन अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर घिरी सरकार बजट घाटा लक्ष्य को भी नहीं बढ़ाना चाहती है। सरकारी खर्च और कमाई के बीच के अंतर को बजट घाटा लक्ष्य कहा जाता है। सरकार हर साल तय करती है कि वो इस बार घाटा कितना कम या ज़्यादा रखेगी।



इसीलिए सरकार विनिवेश (सरकारी कंपनियों को बेचने) द्वारा पैसे कमाना चाहती है। सरकार का तर्क है कि वो 20 हज़ार करोड़ रुपये बाज़ार से उधार लेगी और बाकि विनिवेश से। इस तरह बजट घाटा लक्ष्य नहीं बढ़ेगा। लेकिन इसके लिए देश के संसाधनों को बेचना कहा तक सही है।

विशेषज्ञों का भी कहना है कि अगर केंद्रीय सरकार एक सरकारी कंपनी को दूसरी सरकारी को बेचकर भी पैसे कमाएगी तब भी बाज़ार पर इसका नकारात्मक असर ही पड़ेगा।

बता दें, कि मोदी सरकार लगातार सरकारी कंपनियों के बेचकर धन जुटा रही है। वर्ष 2017-18 में 11 जनवरी तक सरकार सरकारी कंपनियों को बेचकर 54 हाज़र 337 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। पिछले साल बजट पेश करते हुए वित्तीय मंत्री अरुण जेटली ने विनिवेश द्वारा 72 हज़ार 500 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था।

Courtesy : Bolta Hindustan

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