गुजरात प्रत्याशियों ने कहा-ये सरकार ईवीएम सरकार है! हाईकोर्ट जाने की हुई तैयारी

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अहमदाबाद। पाटीदार नेता हार्दिक पटेल चुनाव परिणाम के बाद से ही दावा कर रहे हैं कि बीजेपी ने 15–20 सीटों को ईवीएम से छेड़छाड़ कर जीत हासिल की है। हार्दिक के दावे की पुष्टि उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल के विरुद्ध कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ने वाले जीवा भाई पटेल ने भी की है। जीवा भाई ने जनचौक संवादाता से बातचीत में बताया कि नितिन पटेल ने ईवीएम सेटिंग के साथ-साथ सत्ता का पूरा दुरुपयोग किया है।

जीवा भाई का दावा है कि पाटीदार आन्दोलान के चलते नितिन पटेल को पहले से आभास हो गया था कि वो मेहसाणा से चुनाव हार जायेंगे। इसीलिए आचार संहिता लागू होने से पहले नितिन भाई ने अपने पसंदीदा अधिकारी एस के पटेल का मेहसाणा ट्रान्सफर करा लिया था। कलेक्टर सहित सभी अधिकारी बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे थे।

उनका कहना है कि नितिन पटेल ने कलेक्टर के सहयोग से उन पोलिंग बूथ पर मशीनें बदल दीं जहां पर नितिन पटेल को कम वोट मिलने वाले थे। नितिन पटेल के लोगों ने कलेक्टर के साथ मिलकर कई पोलिंग बूथों (जहाँ पर कांग्रेस के इंचार्ज नहीं थे) पर फर्जी वोट भी डाले। इसके लिए कलेक्टर ने नितिन पटेल के लोगों को पोलिंग स्टेशन के अन्दर जाने के पास अलग से जारी कर रखे थे। जिस कारण सिक्योरिटी के लोग ऐसे तत्वों को नहीं रोक पा रहे थे। उन लोगों ने तन्त्र के साथ मिलकर फर्जी मतदान किया।

मेहसाणा में बहुत सी कालोनियां ऐसी हैं जहां पर नितिन पटेल को प्रचार भी करने नहीं दिया गया फिर भी वोट मिले। जीवा भाई के अनुसार नितिन पटेल ने ब्लू टूथ द्वारा हैक कर वोट प्राप्त किया। जीवा भाई का दावा है कि कई पोलिंग स्टेशन पर उन्होंने खुद चेक किया तो ईवीएम मोबाइल ब्लू टूथ से कनेक्ट हो जा रही थी।

आप को बता दें ब्लू टूथ से ईवीएम कनेक्ट होने की खबर कई जगह से आई थी। प्रदेश के बड़े नेता अर्जुन मोढ्वाडिया ने भी ब्लू टूथ से कनेक्ट ईवीएम के स्क्रीन शॉट ट्वीट किए थे। जीवा भाई के जीतने और मेहसाणा सीट से नितिन पटेल की हार का अंदाज़ा मीडिया ने भी लगाया था। पाटीदार आन्दोलन का एपिसेंटर होने के कारण बीजेपी का इस सीट को दोबारा जीतना अत्यंत महत्वपूर्ण था।

2012 के विधानसभा चुनाव में नितिन पटेल ने लगभग 25000 वोटों से नटवर भाई पी पटेल को पराजित किया था। 2107 के विधानसभा में नितिन पटेल ने कांग्रेस के जीवा भाई पटेल को मात्र 7000 वोटों से पराजित किया। इस सीट पर सबसे अधिक 34 निर्दलीय उम्मीदवार थे निर्दल उम्मीदवारों के वोटों ने भी नितिन पटेल की जीत में अहम भूमिका अदा की। जीवा भाई का कहना है कि ईवीएम के कारण लोकशाही खतरे में है। सत्ता पक्ष में बैठी बीजेपी जब चाहेगी जिसे चाहेगी ईवीएम के सहारे पराजित कर देगी।

भरूच की वागरा सीट से सुलेमान पटेल कांग्रेस के उम्मीदवार थे जो अर्जुन सिंह राना से मात्र 2600 वोटों से चुनाव हार गए। लेकिन यहां भी ईवीएम में कई गड़बड़िया देखी गयी हैं। सुलेमान पटेल ने जनचौक को बताया कि उनकी विधानसभा के एक बूथ जिसमें 591 वोट पोल हुए थे लेकिन गिनती के समय मशीन से 601 वोट निकले। इसी प्रकार से 226 नम्बर के बूथ में 690 वोट रजिस्टर में दर्ज हुए लेकिन गिनती में 688 अर्थात 2 वोट कम निकले रजिस्टर वोटों और गिनती में निकले वोटों में भी 700 वोटों का फर्क निकल रहा है।

जिसके चलते ईवीएम पर बहुत से प्रश्न खड़े हो रहे हैं। सुलेमान पटेल अपने चुनाव में हुई गड़बड़ी के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। संभवतः गुरुवार को वकील आईए सैय्यद के मार्फ़त गुजरात हाईकोर्ट में याचिका करेंगे। वागरा और मेहसाणा जैसी घटनाएं सूरत की कई सीटों पर भी देखने को मिली हैं।

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