कौन है ये सुप्रीम कोर्ट के 4 जज, जो ‘लोकतंत्र’ को खतरें में बता रहे हैं, जानिए

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देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट के जज को प्रेस कांफ्रेंस करके ये बताना पड़ा कि सुप्रीम कोर्ट में सब ठीक नहीं चल रहा है। प्रेस कांफ्रेंस में शामिल चार वरिष्ट जजों ने ये बात मीडिया में बताई।

हम आपको बताते है उन चार जजों के बारे में:

जस्टिस चेल्मेश्वर:

आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के जस्टिस चल्मेश्वर साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने। चेल्मेश्वर ने आंध्र विश्वविद्यालय से 1976 में क़ानून की पढ़ाई की उसके बाद 13 अक्टूबर, 1995 में वो एडिशनल एडवोकेट जनरल बने।

चेल्मेश्वर ने 2015 में Right To Speech के तहत भारतीए पुलिस के उस कानून को खत्म कर दिया जिससे पुलिस किसी भी असुविधा उत्तपन करने वाले ईमेल या इलेक्ट्रॉनिक संदेशों के आरोपी को गिरफ्तार कर लेती थी।

जस्टिस रंजन गोगोई:

जस्टिस रंजन गोगोई 1978 में पहली बार गुवाहाटी हाईकोर्ट में वकील बने। लंबे समय तक वकालत करने के बाद 28 फरवरी 2001 को वह गुवाहाटी हाईकोर्ट में स्थाई जज के रूप में नियुक्त किये गए। 23 अप्रैल 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने।

जस्टिस रंजन गोगोई अक्टूबर 2018 में भारत के चीफ़ जस्टिस बनने वाले है। भारत के नार्थ-ईस्ट से रंजन गोगोई पहले चीफ़ जस्टिस होंगे।

जस्टिस मदन भीमराव लोकुर:

जस्टिस भीमराव लोकुर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से 1977 में एलएलबी की डिग्री हासिल की जिसके बाद उन्होंने उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत की। भीमराव लोकुर 1981 में परीक्षा पास करके सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड में पंजीकृत हुए।

1990 से 1996 तक केंद्र सरकार के अधिवक्ता भी रहे और 1997 में वो वरिष्ठ वकील नियुक्त कर दिए गए। जस्टिस मदन भीमराव लोकुर को 4 जून 2012 को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था।

मई 2012 में, अल्पसंख्यकों के लिए 4।5% उप-कोटा को आवंटित करने के भारत सरकार के फैसले को भीमराव लोकुर खंडित कर दिया था।

जस्टिस कुरियन जोसेफ़:

जस्टिस कुरियन, केरल लॉ एकेडमी लॉ कॉलेज से क़ानून की पढ़ाई की थी। 1996 में वो केरल हाई कोर्ट में सीनियर वक़ील बने और 12 जुलाई 2000 को वो केरल हाई कोर्ट में जज बने। जस्टिस कुरियन 8 मार्च, 2013 को सुप्रीम कोर्ट में जज बने और 29 नवंबर, 2018 को वो रिटायर होने वाले हैं।

जस्टिस कुरियन ने 2014 में इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणों की स्वीकार्यता के मुद्दे पर अफजल गुरु के फैसले को खारिज कर दिया था।

Courtesy : Bolta Hindustan

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