इंडिया टुडे की पत्रकार ने लिखा- एंकर, रिपोर्टर और एडिटर मिलकर नफरत फैला रहे हैं, चैनल ने छीन ली नौकरी

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मीडिया में तमाम पत्रकार ऐसे हैं जो दिन-रात नफरत की बातें करते रहते हैं और अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर जहरीले बोल बोलते रहते हैं। उन पर कभी किसी मीडिया समूह ने कोई कड़ा एक्शन नहीं लिया है लेकिन नफरत की राजनीति के खिलाफ ट्वीट करने के लिए इंडिया टुडे की पॉलिटिकल एडिटर को इस्तीफा देना पड़ा है।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि नफरत को आधाधुंध बढ़ावा दिया जा रहा है, फेक न्यूज फैलाने वाले एंकर , एडिटर और रिपोर्टरों को तवज्जो देकर नौकरी में रखा जा रहा है। इस तरह की नफरतगर्दी से बाज आना चाहिए और जो भी सेकुलर मूल्यों के राजनेता या उद्योगपति हैं उन्हें ऐसे लोगों का बायकॉट करना चाहिए।


ऐसा ट्वीट करने के बाद डेली ओ की पत्रकार अंगशुकांता चक्रवर्ती को उनके एक सीनियर एडिटर का फोन आता है और कहा जाता है कि वह अपना ट्वीट हटा लें।

उन्होंने ट्वीट हटाने से मना कर दिया तो उन्हें तीन विकल्प दिए गए।

1 . ट्वीट डिलीट कर ले

2. या फिर रिजाइन कर दें

3. या फिर अपना कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दें

इंडिया टुडे समूह को इतनी असुरक्षा शायद इसलिए भी हुई है क्योंकि टीवी पत्रकारिता में सबसे जहरीले बोल बोलने वाला एंकर रोहित सरदाना अब ‘आज तक’ की शान बना हुआ है जिसने कासगंज मामले में नफरत फैलाने की पूरी कोशिश की थी।

इससे एक कदम आगे जाते हुए एडिटर अभिजीत मजूमदार ने एक फेक न्यूज़ शेयर करते हुए लिखा था कि चंदन गुप्ता के बाद कासगंज में राहुल उपाध्याय की भी मौत हुई। इसके साथ ही उन्होंने कम्युनल टिप्पणियां लिखी थी।

अपने हिंदुत्ववादी एजेंडे पर चल चुका इंडिया टुडे समूह अब संस्थान के अंदर सेकुलर आवाजों को दबाने के लिए मुखर लोगों के पर काटना शुरू कर दिया है। जिस क्रम में इसी समूह के अंतर्गत आने वाले डेली ओ की अंगशुकांता चक्रवर्ती निकाला गया है।

इससे ये तो तय हो जाता है कि अभी गोदी मीडिया में नफरतगर्दों के लिए जगह है लेकिन सेकूलर मूल्य वाले पत्रकारों के लिए नहीं।

साभार- द वायर

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