अमित शाह की बढ़ेंगी मुश्किलें, जस्टिस लोया की मौत पर उठे सवालों पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने को तैयार

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सीबीआई जज बृजमोहन लोया की संदिग्ध मौत के मामले में सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट की वकील अनिता शिनॉय ने जनहित याचिका दाखिल कर जज लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अनिता शिनॉय की जनहित याचिका को मंजूर करते हुए शुक्रवार से मामले की सुनवाई के आदेश दिए हैं।

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की निगरानी में तीन जजों की बेंच करें। बता दें कि जस्टिस लोया सीबीआई के स्पेशल कोर्ट में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थें।



इस हाई प्रोफाइल केस में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह समेत गुजरात के कई बड़े अधिकारी नामजद थे।

क्या है सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामला?

बीबीसी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2005 में गुजरात पुलिस ने कथित तौर पर सोहराबुद्दीन शेख का अहमदाबाद एयरपोर्ट के पीछे एक स्थान पर कथित एनकाउंटर किया था। सोहराबुद्दीन पर चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ जुड़े होने और गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में हथियार सप्लाई करने के आरोप थे।

ये कथित एनकाउंटर नवंबर 2005 में उस वक्त हुआ था जब सोहराबुद्दीन शेख, पत्नी कौसर बी और साथी तुलसीराम प्रजापति हैदराबाद से एक बस में सांगली आ रहे थे। उसी दौरान पुलिस ने बस का पीछा किया और अहमदाबाद लाने के दौरान एनकाउंटर कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गुजरात पुलिस ने इस कथित एनकाउंटर की जांच की थी। गुजरात पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र देकर इस एनकाउंटर को फ़र्ज़ी बताया था। मीडिया रिपोर्ट के माने तो शेख के साथी तुलसीराम प्रजापति को भी 2006 में गुजरात पुलिस द्वारा मार डाला गया। उसे सोहराबुद्दीन मुठभेड़ का गवाह माना जा रहा था।

इस मामले में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और डीजी वंजारा समेत कुल 38 लोग अभियुक्त बनाए गए थें।

Courtesy : Bolta Hindustan

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