अटल सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा का मोदी सरकार पर हमला, बोले- गुजरात चुनाव के लिए ‘देश’ बर्बाद न करें मोदी

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भाजपा के वरिष्ठ नेता और अटल सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा मोदी सरकार को लगातार आर्थिक मोर्चे पर घेर रहे हैं। नोटबंदी और जीएसटी से अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती को लेकर वो लगातार मोदी सरकार पर वार कर रहे हैं।

हाल ही में जीडीपी के इस साल के चौथी तिमाही के आंकड़े आए हैं। नोटबंदी के बाद लगातार गिरने के बाद जीडीपी में इस बार वृद्धि हुई है लेकिन यशवंत सिन्हा ने सरकार के इस आकड़े पर सवाल उठाए हैं। एनडीटीवी डॉट कॉम के लिए लिखे लेख में उन्होंने ये सवाल उठाए हैं।

लेख में उन्होंने कहा, गुरुवार के दिन आर्थिक मोर्चे की कई खबरें आईं। सुबह पीएम ने एक कार्यक्रम में कहा कि, वह अपने क्रांतिकारी फैसलों की कीमत चुकाने को तैयार हैं। लेकिन शाम को एक खबर आई कि वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में जीडीपी 5.7% से बढ़कर 6.3% पहुंच गई है। इसके बाद मोदी सरकार को चौतरफा बधाइयां मिलने लगीं।




यशवंत ने सवाल उठाया कि, अगर आर्थिक मोर्च पर सभी कुछ अच्छा है तो पीएम को राजनीतिक कीमत क्यों चुकानी पड़ेगी ? क्या यह गुजरात विधानसभा चुनावों में खुद के लिए निजी सहानुभूति पाने की कोशिश तो नहीं है?

जीडीपी पर सवाल उठाते हुए सिन्हा ने लिखा कि अगर बात 6.3% की विकास दर की करें तो सबसे ज़्यादा 7% बढ़ोतरी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हुई। जबकि पिछले साल यह 7.7% थी।

इसमें कोई संदेह नहीं कि पिछली तिमाही से बढ़कर यह 1.2% हो गया है, लेकिन इंडियन एक्सप्रेस में छपे एक आर्टिकल में हरीश दामोदरन और संदीप सिंह ने संकेत दिया कि केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा संकलित IIP डेटा के मुताबिक इस अवधि में यह सिर्फ 2.2% है।

यह उस तरीके के बारे में गंभीर सवाल उठाता है, जिसमें हम जीडीपी की गणना कर रहे हैं। सिन्हा ने लिखा, यह अब उत्पादन के आंकड़ों में परिवर्तन पर आधारित न होकर वैल्यू एडेड आंकड़ों में बदलाव पर आधारित है, भले ही उत्पादन स्थिर रहे या गिर जाए।

इसका मतलब है जीडीपी की गणना इस आधार पर की गई है कि कितने रुपये का उत्पादन हुआ न कि इस पर की कितना उत्पादन हुआ। केवल कीमत के आधार पर जीडीपी की गणना करना विश्वसनीय नहीं माना जाता है।

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